पराली पर अधिकारियों का ओरियेन्टेशन, गांव-गांव जाकर देंगे समझाइश
श्योपुर l कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने कहा कि जिला स्तर एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारी गांव-गांव जाकर पराली फ्री डिस्ट्रिक्ट बनाये जाने की मुहिम को ओर अधिक गति प्रदान करेेंगे। गांव-गांव में किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया जायें तथा पराली प्रबंधन में उपयोगी कृषि यंत्रो सुपर सीडर, स्ट्री रीपर मैनेजमेंट जैसे विकल्पों से अवगत कराया जायें। इसके साथ ही किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान तथा पराली प्रबंधन के लाभों की जानकारी भी दी जायें।
वे आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित पराली प्रबंधन की बैठक में अधिकारियों का उनमुखीकरण कर रहे थे। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री रूपेश उपाध्याय, उप संचालक कृषि श्री जीके पचौरिया सहित विभिन्न विभागो के अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने अधिकारियों का ओरियेन्टेशन करते हुए कहा कि किसानों को बताया जाये कि सुपर सीडर पराली प्रबंधन में बहुत उपयोगी है, यह पूरी जमीन को साफ करता है तथा गेहूं की बुआई भी वैज्ञानिक तरीके से करने में सक्षम है, जिसमें बीज कम लगता है और एक सीध में कतार होने से खरपतवार की गुंजाईश नही रहती। सुपर सीडर चलाने से हैरो का इस्तेमाल नही करना पडता है, इसलिए उसी डीजल में सुपर सीडर चलाया जा सकता है। सुपर सीडर के माध्यम से पराली का निष्पादन करने से गेहूं की फसल की बुआई भी समय पर की जा सकती है, क्योकि पराली जलाने के लिए पहले उसके सूखने का इंतजार करना होता है, इसके बाद हैरो लगाकर पराली को जमीन से निकाला जाता है, इस अवधि में बोनी का समय निकल जाता है और गेहूं का उत्पादन कम होता है, यदि पराली का समय पर प्रबंधन कर लिया जाये तो गेहूं की बोनी भी समय पर होगी और पैदावार भरपूर मिलेगी। इसके अलावा एक फायदा और मिलता है, जो यह है कि धान की नमी में ही गेहूं की बुआई हो जाती है।
उन्होने कहा कि किसानों को सुपर सीडर खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाये तथा बताया जाये कि शासन द्वारा 40 प्रतिशत अर्थात 1 लाख 20 हजार का अनुदान भी दिया जा रहा है। इसी प्रकार धान की कटाई के लिए उपयोग में लाये जाने वाले हार्स्वेटर में स्ट्रा रीपर मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग कर भी पराली का प्रबंधन किया जा सकता है।



