दिल्ली का महत्वाकांक्षी परम् (सिद्धार्थ मल्होत्रा) नए-नए स्टार्टअप्स में निवेश करने का शौक़ रखता है। उसका नया प्रोजेक्ट है एक डेटिंग ऐप, जो दावा करता है कि सही सोलमेट सिर्फ़ प्रोफ़ाइल बिहेवियर से खोजा जा सकता है। पिता (संजय कपूर) शर्त रखते हैं कि पहले परम् खुद इसे आज़माए।

ऐप उसे मिलाता है सुंदरी (जान्हवी कपूर) से केरल की एक सादगी से भरी लेकिन बेहद मज़बूत लड़की से। दोनों बिल्कुल अलग दुनियाओं से आते हैं, लेकिन जब परम् उसे सच में मिलने के लिए केरल पहुंचता है, तो कहानी टेक्नॉलजी की नहीं रहती, बल्कि दिलों की हो जाती है।

तुषार जलोटा कहानी को इतनी सहजता से कहते हैं कि यह उपदेश नहीं, बल्कि एहसास लगती है। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने प्यार को डिजिटल “मैचिंग” से निकालकर इंसानी भावनाओं तक पहुंचाया। सिद्धार्थ मल्होत्रा परम् के रूप में मनमोहक हैं कभी जिज्ञासु, कभी भावुक। वहीं जान्हवी कपूर का किरदार फ़िल्म का दिल है। सुंदरी के रूप में वह बेहद स्वाभाविक और असरदार दिखती हैं। दोनों की केमिस्ट्री धीरे-धीरे परवान चढ़ती है और यही धीमी गहराई फ़िल्म को खूबसूरत बनाती है