भोपाल l “जल गंगा संवर्धन अभियान आज भले ही समाप्त हो रहा हो लेकिन जल संरक्षण और जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए मानस यात्रा निरंतर चलती रहेगी। नदियों के उद्गम स्थल पहुँच कर उनके संरक्षण के लिए जन समुदाय को प्रेरित करने की यह यात्रा अब रुकेगी नहीं। उद्गम नदियों की शुरुआत का प्रतीक तो है ही, हमारे जीवन का भी अविरल प्रतीक है। इस प्रतीक का संरक्षण हम सभी का प्राथमिक कर्तव्य है।” यह बात पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतिम दिवस पर सिवनी ज़िले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।

मंत्री श्री पटेल की मानस यात्रा का कारवां आज सिवनी ज़िले के बैनगंगा,सनेर एवं शेर नदी के उद्गम स्थल पहुँचा। यह उन्होंने पौधारोपण व पूजन कर जनसंवाद किया। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि जब प्रकृति आशीर्वाद देती है तो सुखद संयोग बनते हैं। आज गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर सपरिवार तीन नदियों के उद्गम स्थल के दर्शन किए।उद्गम नदियों की शुरुआत का प्रतीक तो है ही हमारे जीवन का भी अविरल प्रतीक है। नदियों का बहना इसी तरह बंद होता रहा तो हमारा जीवन भी ज्यादा सुखद नहीं रहेगा। नदियों को संरक्षित और पल्लवित करने के संकल्प की गंगा बहाकर,तीन गंगा के योग में चौथा जन समुदाय को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि नदी सिर्फ पानी के लिए नही है, वह हमारी संस्कृति का आधार स्तम्भ है। नदी एक जीवन शैली है, नदी सिर्फ पानी का दरिया नहीं की पानी बह रहा है तो उसको हम नदी मान लें। नदी तो सन्देश देती है, निरंतर निस्वार्थ सेवा का, समर्पण का, समरसता का।

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि वे अगले वर्ष इसी अवधि में पुनः इन स्थलों का भ्रमण कर उनके द्वारा रोपित किए गए पौधों की स्थिति तथा जल संरक्षण के लिए किए गये प्रयासों का मूल्यांकन करेंगे। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ पौधे लगाने मात्र से हमारा कर्तव्य पूरा नहीं होता बल्कि यह सुनिश्चित करना कि यह पौधे जीवित रहें और वृक्ष का आकार लें हमारी सहभागिता को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि नदियों के उद्गम स्थलों की मानस यात्रा के दौरान मंत्री श्री पटेल ने प्रदेश की 28 विभिन्न नदियों के उद्गम स्थलों पर पहुंचकर पूजन,वृक्षारोपण एवं जनसंवाद किया।