किरदार को जीना ही असली अभिनय है - कुमुद मिश्रा
(सुनील सोन्हिया द्वारा लिया गया साक्षात्कार)
भोपाल l भारतीय सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हैं जो बिना स्टारडम के भी अपने अभिनय से दर्शकों के दिल में खास जगह बना लेते हैं। उन्हीं कलाकारों में एक नाम है कुमुद मिश्रा का। रंगमंच से निकले इस अभिनेता ने फिल्मों और वेब सीरीज़ में अपने सशक्त अभिनय से अलग पहचान बनाई है। लगभग तीन दशकों से अधिक समय से वे अभिनय की दुनिया में सक्रिय हैं और हर भूमिका में अपनी गहराई और संवेदनशीलता से दर्शकों को प्रभावित करते हैं। उनकी अभिनय यात्रा यह साबित करती है कि मेहनत, समर्पण और कला के प्रति ईमानदारी से किसी भी कलाकार को सफलता मिल सकती है।
कुमुद मिश्रा ने कहा कि इन दिनों हम भोपाल में शूटिंग कर रहे हैं. इसलिए मैं रंगों के साथ होली नहीं खेल सकता लेकिन मैं अंदर से रंगा हुआ हूं. मैं घर वालों के साथ होली नहीं मना पा रहा हूं. क्योंकि मैं लगातार यात्रा कर रहा हूं, घर वालों के साथ होली मनाना बहुत अच्छा लगता है. एक्टर ने बचपन की होली को याद करते हुए कहा कि मेरे भांग खाने के एक-दो बार अनुभव रहे हैं. वो अनुभव मेरा बहुत खराब था. इसलिए मैंने तय कर लिया कि यह तो मैं नहीं कर सकता.
थिएटर से शुरू हुआ सफर
कुमुद मिश्रा का मानना है कि थिएटर ने ही उन्हें अभिनेता बनाया। वे कहते हैं कि रंगमंच ने उन्हें अभिनय का अनुशासन और किरदार को समझने की क्षमता दी। थिएटर के अनुभव ने उन्हें फिल्मों में भी वास्तविक और प्रभावशाली अभिनय करने में मदद की।
कुमुद मिश्रा का मानना है कि अभिनय केवल लोकप्रियता पाने का माध्यम नहीं है बल्कि यह एक गंभीर कला है। वे कहते हैं कि कलाकार को हर किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए, तभी वह दर्शकों तक सच्चाई के साथ पहुँचता है।
कुमुद मिश्रा की प्रमुख फिल्मों के नाम -
सरदारी बेगम, रॉकस्टार, रांझणा, बदलापुर, एयरलिफ्ट सुल्तान ,जॉली एलएलबी 2, अय्यारी,मिशन मंगल,राम सिंह चार्ली ,थप्पड़ टाइगर 3, द ग्रेट इंडियन फैमिली,मिस्टर एंड मिसेज माही आदि प्रमुख है l



