भोपाल l मंत्रालय में इन दिनों स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री छाए हुए हैं l इनसे मिलने आने वाले लोगों की भारी भरकम भीड़ और इनकी कार्यशैली की चर्चा अब हर तरफ हो रही है l मंत्रालय में इनकी सहज उपलब्धता के कारण ही आमजन और कार्यकर्ताओं में यह नेरेटिव सेट हो गया है कि मंत्रालय में कोई मंत्री मिले या ना मिले लेकिन स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री तो मिल ही जाते हैं l लोकसभा में भी अपनी लगभग शत प्रतिशत उपस्थित और सक्रियता के चलते राष्ट्रीय राजनीति के बड़े नेता भी इनके मुरीद हैं और रही बात अनुभव की तो एक बार उनके विभाग के ही मंत्रालय के एक अफसर हाई कोर्ट से संबंधित एक फाईल लेकर उनके पास आए और मंत्री जी के समक्ष रख दी l मंत्री जी ने फाईल के पन्नें पलटे और अधिकारी महोदय की ना सिर्फ क्लास ही ले डाली बल्कि उन्हें नसीहत भी दे दी l मंत्री जी ने उनको दो टूक कह दिया कि जब यह काम मंत्रालय से ही हो सकता था तो फिर उस व्यक्ति को हाईकोर्ट क्यों जाना पड़ा ..? यदि यह काम मंत्रालय से ही हो जाता तो ना तो विभाग को अनावश्यक एक्सरसाइज करनी पड़ती और ना ही संबंधित को हाईकोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते मंत्री जी की नसीहत पर अधिकारी भी समझ गए की रांग नंबर लग गया है l