दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और फ्री हैंड खाकी का शौर्य
नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश : लाल आतंक का सफाया यूँ ही नहीं हो गया, 2 साल में कई घटनाओं का गवाह बना है राज्य
प्रसंगवश
डॉ. दीपक राय
मध्यप्रदेश की धरती से साढ़े तीन दशक पुराने नक्सलवाद के खात्मे की पटकथा किसी एक दिन में नहीं लिखी गई, बल्कि यह उस दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति की सफलता है, जिसने दशकों पुराने डर को संकल्प में बदल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पदभार संभालते ही सुरक्षाबलों को जिस 'फ्री हैंड' और स्पष्ट नीति के साथ कार्य करने की स्वतंत्रता दी, उसने जंगलों में तैनात जवानों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। डॉ. यादव का यह संदेश साफ था कि शांति की राह में आने वाले किसी भी रोड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा—चाहे वह नक्सलवाद हो या कोई अन्य अतिवादी ताकत। इसी खुली छूट और शासन के अटूट भरोसे का नतीजा है कि आज मध्यप्रदेश का नक्शा 'लाल आतंक' की छाया से पूरी तरह मुक्त होकर विकास की नई रोशनी से जगमगा रहा है।
हमें यह भी जानना चाहिए कि मध्यप्रदेश, देश का पहला नक्सल मुक्त राज्य बन गया है। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा की ईमानदार कार्यशैली से पुलिस मुख्यालय ने इस मिशन को 'प्रोजेक्ट मोड' पर लिया। मकवाणा के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पुलिस ने 'पुनर्वास से पुनर्जीवन' अभियान चलाकर नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया। साथ ही, पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर नक्सलियों के एमएमसी जोन को पूरी तरह खत्म कर दिया। नक्सलवाद के खिलाफ इस अंतिम प्रहार में नेतृत्व की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाल ही में भोपाल के पुलिस कमिश्नर नियुक्त किए गए संजय कुमार, पूर्व में बालाघाट के आईजी के रूप में इस पूरे अभियान की कमान संभाल रहे थे। उनके कुशल रणनीतिक कौशल और जमीनी नेतृत्व का ही परिणाम रहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस का नेटवर्क अभेद्य बना। संजय कुमार ने न केवल खुफिया तंत्र को मजबूत किया, बल्कि फील्ड में तैनात जवानों में वह आत्मविश्वास भरा जिससे नक्सलियों के गढ़ ध्वस्त हुए। अब भोपाल पुलिस कमिश्नर के रूप में उनकी नई पारी, उनके इसी शानदार रिकॉर्ड और प्रशासनिक दक्षता पर सरकार की मुहर है।
मुख्यमंत्री ने हर बार खाकी का मान बढ़ाया है। बालाघाट के अलंकरण समारोह में 60 जवानों को मिली पदोन्नति भी इसी श्रृंखला की एक कड़ी है, जो बताती है कि इस सरकार में वीरता को फाइलों में नहीं दबाया जाता, बल्कि तुरंत पुरस्कृत किया जाता है। क्योंकि पहले भी एक कार्यक्रम में पुलिस की तत्परता को देखते हुए उन्होंने मौके पर ही पदोन्नति की घोषणा की थी। कल जबकि बालाघाट में ₹100 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की नींव रखी गई है, तो यह स्पष्ट है कि 'फ्री हैंड' की नीति ने न केवल आतंक को खत्म किया, बल्कि विकास के बंद दरवाजे भी खोल दिए हैं। यह जीत जांबाज पुलिस बल के संकल्प और सरकार के अटूट विश्वास की साझा उपलब्धि है।



