महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए
भोपाल। सहजता और सरलता की प्रतिमान महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी वी रश्मि का जन्म बेंगलोर में हुआ। उन्होंने बीए, माउंट कार्मल कॉलेज बेंगलोर से तथा एमए इकोनॉमिक्स, गोखले इंस्टीट्यूट पुणे से और फिर मास्टर आफ पब्लिक पॉलिसी, लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से किया। 2005 बैच की एमपी कैडर की आईएएस अधिकारी जी वी रश्मि सीहोर में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में पहली पोस्टिंग पर रहीं फिर एसडीएम आष्ठा रहीं । इसके बाद में जिला पंचायत सीईओ रहीं ,कलेक्टर डिंडोरी और नीमच रहीं नरेगा में सीईओ और कमिश्नर के रूप में काम किया, हैंडलूम में भी कमिश्नर रही, एकेवीएन और मंडी बोर्ड में एमडी रहीं । वे राजस्व विभाग और जीएडी में भी सचिव के रूप में पदस्थ रही हैं। वर्तमान में वे सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग हैं। उनका कहना है कि मैं प्रतिदिन अपने आप को यह स्मरण कराती हूं कि मैं सिविल सर्वेंट/ पब्लिक सर्वेंट हूं.... मेरा मानना है कि सर्वेंट शब्द स्वयं को अपने सही कर्तव्य की निरंतर याद दिलाने के लिए आवश्यक है । वरिष्ठ पत्रकार तेजेंद्र भार्गव ने उनसे लंबी चर्चा की प्रस्तुत है उस साक्षात्कार के मुख्य अंश....
सवाल - आपकी शिक्षा कहाँ हुई ?
जबाव - मेरी प्रारंभिक शिक्षा, ग्रेजुएशन तक बैंगलोर में एवं पोस्ट ग्रेजुएट पढ़ाई पुणे में हुई है।
सवाल - आपने भारतीय प्रशासनिक सेवा को ही क्यों चुना ?
जबाव - भारतीय प्रशासनिक सेवा की भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ अत्यंत व्यापक एवं बहुआयामी हैं। इस सेवा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसका नागरिकों से सीधा जुड़ाव है, जिसके माध्यम से जमीनी स्तर पर वास्तविक परिवर्तन लाने का अवसर मिलता है। एक अधिकारी के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों, जनजातीय इलाकों, महिलाओं एवं बच्चों के सशक्तिकरण जैसे सामाजिक विषयों पर कार्य करने के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन एवं नीतिगत निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्राप्त होता है। यह सेवा व्यक्ति की सोच, नेतृत्व क्षमता, प्रतिभा एवं रुचि के अनुरूप विविध प्रकार की जिम्मेदारियाँ प्रदान करती है, जिससे व्यापक स्तर पर समाज और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दिया जा सकता
सवाल - आपके दृष्टिकोण से सफलता का मूल मंत्र क्या है?
जबाव - सफलता का मूल मंत्र निरंतर परिश्रम, discipline, विनम्रता, सदैव सीखने की इच्छा, सकारात्मक सोच, ईमानदारी और टीम के साथ समन्वय
सवाल - महिलाएँ मल्टीटास्किंग करने में सक्षम होती हैं। समाज में हर स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। जहाँ तक संवेदनशीलता की बात है, तो महिलाएँ पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील मानी जाती हैं। इस पर आपके क्या विचार हैं?
जबाव - मैं स्वयं को पारंपरिक अर्थों में बहुत अच्छा मल्टीटास्कर नहीं मानती। हालांकि, मैं अपने घर, सामाजिक जीवन और प्रशासनिक दायित्वों के बीच मल्टीटास्किंग से अधिक अनुशासन एव time management से संतुलन स्थापित कर पाती हूँ
जहाँ तक संवेदनशीलता का प्रश्न है, मैं यह नहीं मानती कि महिलाएँ स्वाभाविक रूप से पुरुषों से अधिक संवेदनशील होती हैं। मेरा मानना है कि समाज महिलाओं को बचपन से ही अधिक संवेदनशील और देखभाल करने वाली भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित करता है। इसी सोच में परिवर्तन लाने के लिए आज सरकार भी पुरुषों को मुख्यधारा में लाने (men streaming) विशेषकर बाल-देखभाल और पारिवारिक दायित्वों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दे रही हैं।
महिलाओं के विरुद्ध अपराधों या हिंसा की समस्या का समाधान केवल निगरानी तंत्र बढ़ाने से नहीं, बल्कि बालकों और पुरुषों में महिलाओं के प्रति सम्मान, समझ और समानता के मूल्यों को विकसित करने से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। समाज में वास्तविक प्रगति तब होगी जब हम लिंग-आधारित धारणाओं से ऊपर उठकर समान अवसर, समान सम्मान और समान जिम्मेदारी के सिद्धांत पर आगे बढ़ें।
निश्चित रूप से, शासन-प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी एक संतुलित और समावेशी दृष्टिकोण लाती है.
सवाल - महिला एवं बाल विकास विभाग में शिकायतों के निराकरण और पारदर्शिता के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
जबाव - शिकायतों के निराकरण के लिए शासन स्तर पर पहले से ही प्रभावी तंत्र जैसे सीएम हेल्पलाइन एवं ऑनलाइन पोर्टल कार्यरत हैं, जिनसे समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाता है। हितग्राही-योजनाओं में सैचुरेशन के लक्ष्य के साथ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं का पूर्ण लाभ पहुँच सके।
DBT और ‘सिंगल क्लिक’ प्रणाली के माध्यम से हितग्राहियों के बैंक खातों में राशि सीधे और समय पर हस्तांतरित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।भारत सरकार द्वारा टेक-होम राशन (THR) वितरण में फेस रिकग्निशन प्रणाली लागू की गई है तथा उपस्थिति प्रणाली को भी तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना मेरा प्राथमिक लक्ष्य रहेगा।
इसके अतिरिक्त, विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएँ हैं — जैसे एनजीओ को पोर्टल के माध्यम से मान्यता एवं भुगतान की व्यवस्था, THR वितरण में जीपीएस ट्रैकिंग, बारकोडिंग आदि।
सवाल - आपके नज़रिये में कर्म के साथ-साथ भाग्य का साथ मिलना कितना ज़रूरी है?
जबाव - मेरे विचार से भाग्य, कर्म का ही प्रतिफल है। हम जिस प्रकार के कर्म करते हैं, वही आगे चलकर हमारे भाग्य का निर्माण करते हैं। इसलिए मैं भाग्य को किसी अलग या रहस्यमय तत्व के रूप में नहीं, बल्कि यदि व्यक्ति कर्मप्रधान दृष्टिकोण अपनाए, तो परिस्थितियाँ धीरे-धीरे उसके अनुकूल बनने लगती हैं। इसीलिए मेरा विश्वास है कि कर्म ही भाग्य का निर्माता है।
सवाल - अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आप महिलाओं को क्या सलाह देना चाहेंगी ?
जबाव - हम आज जिस स्थान पर पहुँचे हैं, वह अनेक महिलाओं के छोटे-बड़े त्यागों का परिणाम है। इस विरासत को हमें सहजता से खोने नही चाहिए। यह तथ्य कि महिलाओं के लिए अलग हेल्पलाइन, राहत एवं पुनर्वास केंद्र जैसी व्यवस्थाएँ आवश्यक हैं, यह संकेत देता है कि समानता का हमारा लक्ष्य अभी पूरी तरह प्राप्त नहीं हुआ है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर उनके लिए सजग एवं वैधानिक रूप से आवाज़ उठानी चाहिए। प्रत्येक दिन महिलाओं का दिन है — हमें हर अवसर को आत्मविश्वास और संकल्प के साथ चाहिए।
सवाल - आईएएस बनने के बाद से अब तक कोई ऐसा वाक्या आपको याद है जो आपके लिए हमेशा यादगार रहा हो?
जबाव - कन्नड़ कवि संत बसवेश्वर का ‘कायक ही कैलास’ अर्थात्कर्म या आपका काम ही पूजा है
को हमेशा याद रखती हूँ, साथ ही मैं प्रतिदिन अपने आपको यह स्मरण कराती हूँ कि मैं एक Civil Servant/Public Servant हूँ। मेरा मानना है कि servant शब्द स्वयं को अपने सही कर्तव्य की निरंतर याद दिलाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।



