अंधेरे को अपनी ताकत बनाकर अक्षत बल्दवा ने रच दिया इतिहास
इंदौर निवासी श्री अक्षत बल्दवा ने यह साबित कर दिया कि शारीरिक सीमाएं सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। जन्म के डेढ़ माह बाद ‘रेटिनोब्लास्टोमा’ के कारण दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। हिंदी माध्यम से शासकीय विद्यालय में पढ़ाई करने वाले श्री अक्षत ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट उत्तीर्ण कर बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया। विधि की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा का लक्ष्य तय किया और सीमित समय में ही 173वीं रैंक हासिल कर ली। उनका मानना है, "असली दृष्टि आंखों से नहीं, मन से होती है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर, तो कोई बाधा बड़ी नहीं होती।"


