कलेक्टर शिवपुरी के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में जिले में किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने तथा कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) एवं मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) एक्सपोर्ट सेल के संयुक्त तत्वावधान में कृषि-निर्यात संवर्धन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गतदिवस पिछोर एवं करैरा में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुए, जिनमें जिलेभर से आए किसानों, एफपीओ प्रतिनिधियों, कृषक-उद्यमियों एवं कृषि हितधारकों ने सहभागिता की। पिछोर के किसान ज्ञान केन्द्र (एसएडीओ कार्यालय) एवं करैरा की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला (एसएडीओ कार्यालय) में आयोजित किए गए। पिछोर कार्यक्रम में श्री नरेंद्र कठिल, अध्यक्ष व्यापारी महासंघ पिछोर उपस्थित रहे, वहीं करैरा कार्यक्रम में श्री संजय पहाड़िया, अध्यक्ष व्यापारी संघ शिवपुरी एवं श्री रमेश खटीक, विधायक करैरा की गरिमामयी उपस्थिति रही। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य किसानों को “Export Ready” बनाना रहा। विशेषज्ञों द्वारा निर्यात प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक, संभावित बाजार अवसरों एवं गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेस (GAP) संबंधी जानकारी प्रदान की गई। किसानों को बताया गया कि स्थानीय फसलों को गुणवत्ता सुधार एवं जैविक पद्धतियों के माध्यम से निर्यात योग्य बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में एपीडा (APEDA) की भूमिका का भी विस्तृत परिचय कराया गया। यह संस्था भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत है और कृषि एवं प्रसंस्कृत उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का कार्य करती है। एपीडा किसानों को निर्यात प्रशिक्षण, गुणवत्ता परीक्षण एवं प्रमाणन, जैविक खेती हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPOP) के अंतर्गत मान्यता, वित्तीय सहयोग योजनाएँ तथा खरीदार–विक्रेता मुलाकात (Buyer–Seller Meets) जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराता है। विशेषज्ञों ने कहा कि निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उत्पादों में रासायनिक अवशेष (Residue) न हों। यूरोप, अमेरिका और मध्य-पूर्व देशों में ऑर्गेनिक व रेसिड्यू-फ्री उत्पादों की सबसे अधिक मांग है। किसानों को सुझाव दिया गया कि वे वर्मी-कम्पोस्ट, नीम खली, गोबर खाद एवं बायो-फर्टिलाइज़र जैसे प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ाएँ और रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई मात्रा तक ही प्रयोग करें। फसल कटाई से 20–25 दिन पूर्व किसी भी रासायनिक दवा का उपयोग बंद करने की सलाह भी दी गई। शिवपुरी जिले की दृष्टि से मूंगफली, टमाटर, लहसुन, दलहन एवं मशरूम को निर्यात योग्य फसलें बताया गया। मूंगफली उत्पादन में अफ्लाटॉक्सिन-फ्री मानक पर बल दिया गया, जबकि सब्जियों और फल फसलों में गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेस का पालन आवश्यक बताया गया। मशरूम उत्पादन के लिए किसानों को नियंत्रित वातावरण व वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम उपरांत टीम द्वारा पीनट उत्पादन एवं प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण किया गया तथा किसानों को मूंगफली के सुरक्षित भंडारण एवं प्रोसेसिंग तकनीक संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। साथ ही, मशरूम की तकनीकी खेती पर भी विस्तृत जानकारी दी गई।