कृषि–उद्योग मिलन का मंच ‘एग्री-ब्रिज 2025’ जी. एच. रायसोनी विश्वविद्यालय में सफलतापूर्वक सम्पन्न
सायखेडा़ l जी. एच. रायसोनी विश्वविद्यालय, सायखेडा के कृषि विज्ञान स्कूल में 27 और 28 नवम्बर 2025 को दो दिवसीय “एग्री-ब्रिज: कैंपस मीट्स इंडस्ट्री” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवाचार, उद्योग–अकादमिक सहयोग को मजबूती प्रदान करना तथा शाश्वत कृषि विकास को प्रोत्साहित करना रहा।
इस आयोजन में BASF, BAYER सेमिनिस, यशोदा सीड्स, सेंट्रल बायोटेक, एस.एन.एम. एग्रोटेक, गुलशन पॉलीऑल्स और जैन इरीगेशन जैसी प्रतिष्ठित कृषि कंपनियों ने सहभागिता दर्ज कराई।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और विश्वविद्यालय गीत से हुई। कुलपति डॉ. मीना राजेश ने उद्घाटन सम्बोधन में कृषि शिक्षा को उद्योग से जोड़ने की आवश्यकता तथा बदलते कृषि परिदृश्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
दो दिवसीय कार्यक्रम में शाश्वत कृषि, एग्रीटेक नवाचार, कृषि उद्यमिता, जलवायु लचीलापन, हरित अर्थव्यवस्था और कौशल विकास जैसे विविध विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
यशोदा सीड्स के महेश गायकवाड़ ने कृषि के भविष्य एवं कैरियर संभावनाओं पर मार्गदर्शन दिया। सेंट्रल बायोटेक के निदेशक अनिल रासेकर ने शाश्वत ग्रामीण विकास के मॉडल प्रस्तुत किए। एस.एन.एम. एग्रोटेक के सतीश मोहोड ने कृषि उद्यमिता के मार्ग सुझाए, जबकि BASF के शरद तोमर ने कीटनाशकों के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी।
गो विज्ञान फार्मिंग रिसर्च सेंटर, देवलापार के सचिव सनद गुप्ता ने गौ-आधारित खेती पर व्याख्यान दिया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, कलमेश्वर के प्रबंधक प्रफुल धांदरे ने कृषि वित्त एवं ऋण योजनाओं की जानकारी दी।
ट्राई-कनेक्ट इंटरैक्शन ने छात्रों, शिक्षकों और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच सार्थक संवाद का मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों की सहभागिता ने आयोजन को और समृद्ध बनाया। सौंसर के प्रगतिशील किसान श्री मोरेश्वर बोंदरे तथा नागपुर के डॉ. अनुप जैन को उनकी नवाचारी एवं शाश्वत खेती के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान सेंट्रल बायोटेक के निदेशक अनिल रासेकर और डॉ. केविन गवली द्वारा प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का समापन कृषि विज्ञान स्कूल के डीन डॉ. केविन गवली के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए आयोजन टीम—डॉ. चेतन बोंदरे, प्रा. राकेश तुरकर सहित समस्त अध्यापक व गैर-अध्यापक स्टाफ तथा छात्रों के समर्पण और उत्कृष्ट योगदान की सराहना की।
इस सफल आयोजन ने विश्वविद्यालय में उद्योग–अकादमिक सहयोग को नई दिशा प्रदान की और छात्रों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले।



