तिरुवनंतपुरम में भाजपा की जीत को ऐतिहासिक बताते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि उन्होंने 45 वर्षों के एलडीएफ शासन के खिलाफ बदलाव के लिए प्रचार किया था, लेकिन मतदाताओं ने अंततः एक अन्य दल को परिवर्तन का प्रतीक मानते हुए समर्थन दिया।

देखा जाये तो केरल के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे केवल आंकड़ों का खेल नहीं हैं, बल्कि वे राज्य की बदलती राजनीतिक मनोदशा को स्पष्ट रूप से उजागर करते हैं। लंबे समय से वैचारिक रूप से वामपंथ और कांग्रेस के बीच झूलते रहे केरल में अब मतदाता स्थानीय शासन, शहरी विकास और प्रशासनिक दक्षता जैसे मुद्दों पर ज्यादा व्यावहारिक नजरिया अपनाते दिख रहे हैं। राजधानी तिरुवनंतपुरम में भाजपा की जीत यह बताती है कि केरल में भी राष्ट्रीय राजनीति के प्रभाव और शहरी मध्यवर्ग की आकांक्षाएं धीरे-धीरे नई राजनीतिक जगह बना रही हैं। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि भाजपा राज्य में निर्णायक ताकत बन चुकी है, लेकिन इतना तय है कि वह अब हाशिये की पार्टी नहीं रही।