भोपाल l मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान प्रदेश में जन-आंदोलन का रूप ले रहा है। अभियान के तहत जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। हजारों खेत तालाब, कूप-रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण और पुरानी जल संरचनाएं पुनर्जीवित की जा रही हैं। जनभागीदारी और नवाचार से अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान में अब तक 39 हजार 977 खेत तालाबों का निर्माण, 59 हजार 577 कूप-रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण तथा 21 हजार 950 से अधिक पूर्व निर्मित जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जा चुका है।

खंडवा, खरगोन, डिंडोरी, राजगढ़ बालाघाट अग्रणी

अभियान के क्रियान्वयन में खंडवा, खरगोन, डिंडोरी, राजगढ़ और बालाघाट जिले अग्रणी हैं। नगरीय निकायों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, नाले-नालों की सफाई और सौंदर्यीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत बैतूल, अशोकनगर, बालाघाट, डिंडोरी और नरसिंहपुर जिले शीर्ष स्थान पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 19 मार्च गुड़ी पड़वा को जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया था, जो 30 जून तक जारी रहेगा। विभिन्न जिलों में इस अभियान में कई नवाचार हो रहे हैं, यह एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि वे जल संरक्षण के इस महत्वपूर्ण अभियान से जुड़ें।

आयुक्त, मनरेगा श्री अवि प्रसाद ने बताया कि अभियान के लिए लगभग 6 हजार 278 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग के अंतर्गत 6 हजार 236 करोड़ रुपये की लागत से 2 लाख 44 हजार कार्यों का क्रियान्वयन जारी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल गुणवत्ता परीक्षण, पाइप लाइनों और नलों के लीकेज सुधार जैसे कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। जन अभियान परिषद से जुड़ी संस्थाएं प्रभात फेरियों, रैलियों, जल संगोष्ठियों, दीवार लेखन और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से ग्राम स्तर पर जन-जागरूकता बढ़ा रही हैं।

अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए ग्राम और वार्ड स्तर पर कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नहरों की सामूहिक सफाई, पौधरोपण, घाटों की सफाई और जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में सामूहिक श्रमदान को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन गतिविधियों में पंचायत एवं नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों, व्यापारी संगठनों सहित विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

जल संरक्षण केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प है। राज्य सरकार इस दिशा में ठोस और परिणामोन्मुखी प्रयास कर रही है, जिससे प्रदेश में जल संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित ।