जिसके घर शीशे के हो वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते हैं। अमेरिका पर यह लाइनें फिट बैठती हैं। चीन के तियानजिन शहर में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आपस में गर्मजोशी से मिले, तस्वीरें खिचवाई और मुस्कुराते दिखे तो पहली बार अमेरिका की बेचैनी साफ साफ नजर आई। अमेरिका की घबराहट इतनी बढ़ गई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से तुरंत बयान सामने आ गया और वो भारत के साथ व्यापार को डिजास्टर बताया है। लेकिन असलियत यही है कि ये अमेरिका की मजबूरी है। भारत की कूटनीति की जीत है।  तिनजियांग में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन केवल डिप्लोमैटिक मीटिंग नहीं थी। यहां मंच पर बड़ी तस्वीरें सामने आई। मोदी और शी जिनपिंग की मुस्कुराहट, मोदी पुतिन की कार की सवारी, तीनों नेताओं का एक साथ खड़ा होना। ये नजारा सिर्फ तस्वीरें नहीं बल्कि ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स की नई पटकथा बयां करती है।