स्वर-साधना के एक स्वर्णिम युग का अवसान : संस्कृति मंत्री श्री लोधी
भोपाल l संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने स्वर-साम्राज्ञी आशा भोसले के अवसान पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका महाप्रयाण संगीत जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी रिक्तता सदैव अनुभव की जाती रहेगी। वे केवल एक पार्श्व गायिका नहीं, बल्कि भावों की अनंत अभिव्यक्ति थीं, जिनके हर सुर ने श्रोताओं के हृदय में एक नई अनुभूति को जन्म दिया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजन और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ प्रकट कीं।
राज्य मंत्री श्री लोधी ने बताया कि मध्यप्रदेश की कला-प्रेमी धरा का आशा जी से गहरा और आत्मीय संबंध रहा है। वर्ष 1984 में महान गायिका लता मंगेशकर की स्मृति में स्थापित "राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान" की गौरवशाली श्रृंखला में, वर्ष 1989 में आशा भोसले को इस प्रतिष्ठित अलंकरण से विभूषित किया गया था। उनकी बहुआयामी और जीवंत आवाज़ ने भारतीय पार्श्व गायन को वैश्विक ऊँचाइयों तक पहुँचाया। अतीत की स्मृतियों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में आयोजित भव्य समारोह में आशा जी की जादुई प्रस्तुति ने समूचे वातावरण को सुरों की अनुपम सरिता में सराबोर कर दिया था। उनकी गायकी समय और सीमाओं से परे थी, जिसने सात दशकों तक भारतीय संगीत की विरासत को जीवंत बनाए रखा। संस्कृति विभाग इस महान संगीत साधिका के चरणों में अपनी विनम्र आदरांजलि अर्पित करता है।


