दुबई से… मेरी आँखों देखा हाल!

मैं इस वक़्त दुबई में हूँ। जब पहली बार धमाके की आवाज़ आई तो दिल एक पल के लिए सच में सिमट गया। आसमान में हलचल थी, फिर पता चला कि मिसाइलें हवा में ही नष्ट कर दी गईं। 

दिन भर 4–5 बार धमाकों की आवाज़ सुनाई दी। हर बार लोग ठिठक जाते। मोबाइल पर हलचल बढ़ जाती। बहुत फोन आ रहे है की आप ठीक हो, वहाँ हालात कैसे हैं? सच कहूँ तो यहाँ से ज़्यादा बेचैनी मुझे अपने घर वालों की, अपने दोस्तों की आवाज़ में  महसूस हुई।

यहाँ प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। एडवाइजरी जारी हो चुकी है। साफ कहा गया है कि अफ़वाहों पर ध्यान न दें सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। हालात काबू में हैं लेकिन माहौल में तनाव तो है ही।

जब आसमान में आग की लकीरें दिखती हैं तो इंसान चाहे जितना मज़बूत हो, अंदर से हिल जाता है।

मैं यह भी देख रहा हूँ कि जंग सिर्फ देशों के बीच नहीं होती, वह हर घर के अंदर उतर जाती है। माँ की नींद उड़ा देती है, बच्चों के चेहरे पर सवाल छोड़ जाती है। यहाँ रहने वाला हर शख्स कमाने, ख्वाब पूरे करने आया है। आज सबकी एक ही दुआ है कि हालात जल्द साज़गार हों जाए।

मैं आप सबको यक़ीन दिलाना चाहता हूँ कि हम यहाँ संभल कर हैं। हालात पर नज़र है। घबराहट से कुछ हासिल नहीं होता। हाँ, एहतियात ज़रूरी है लेकिन डर को अपने ऊपर हावी करना समझदारी नहीं।

मैं यही कहना चाहता हूं की दूर बैठकर वीडियो और अफ़वाहें आगे मत बढ़ाइए। दुआ कीजिए, हौसला दीजिए। जंग की आवाज़ें तेज़ हो सकती हैं मगर हमारा यक़ीन उससे ज़्यादा मज़बूत होना चाहिए। मैं यहाँ खड़ा हूँ, दिल मज़बूत है और आप भी मज़बूत रहिए।

"ज़ाहिद खान"