बिना मान्यता और बिना पंजीयन के सिर्फ कागजों में चल रहा महर्षि वाल्मीकि संस्कृत एवं योग शिक्षण संस्थान
दतिया / मुख्यमंत्री के सुशासन एवं पारदर्शी प्रशासन के संकल्प के अनुरूप दतिया जिला प्रशासन द्वारा एक गंभीर मामले में सख्त और तथ्यपरख कार्रवाई की गई है। कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखड़े के निर्देश पर गठित जिला स्तरीय जांच समिति ने महर्षि वाल्मीकि संस्कृत एवं योग शिक्षण संस्थान से संबंधित शिकायतों की विस्तृत जांच की। जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्थल पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक समिति द्वारा उत्तर प्रदेश जाकर जांच की गई। समिति के सदस्यों द्वारा संस्था की वेबसाइट में अंकित लखनऊ में दर्शाए गए पते पर निरीक्षण किया गया, जहां संबंधित संस्था का कोई भी कार्यालय, कक्षा अथवा शैक्षणिक गतिविधि संचालित नहीं पाई गई। समिति सदस्यों द्वारा माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद से प्रत्यक्ष समन्वय कर संस्था की मान्यता, पंजीयन एवं अध्ययन केंद्रों की स्थिति की पुष्टि की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित संस्था को किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड अथवा परिषद से वैध स्वीकृति या समकक्षता प्राप्त नहीं है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संस्था द्वारा जारी अंकसूचियां एवं प्रमाणपत्र भ्रामक, संदिग्ध एवं अप्रमाणिक हैं। दस्तावेजों में उल्लिखित अध्ययन केंद्र न तो संचालित पाए गए और न ही अन्यत्र वैध रूप से पंजीकृत पाए गए। वेबसाइट के माध्यम से दी गई जानकारी भी भ्रामक पाई गई। जांच समिति द्वारा उपरोक्त सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए संबंधित संस्था द्वारा जारी अंकसूचियां ,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका नियुक्ति प्रक्रिया-2025 में स्पष्ट रूप से विचारणीय नहीं माना जाना, दर्शाया गया है ताकि चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता बनी रहे। कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखड़े ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दतिया जिला प्रशासन की यह कार्रवाई शिक्षा एवं चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सशक्त संदेश है।



