साहब में अभी जिंदा हूं : दो वर्ष से खुद को जिंदा साबित करने की लडा़ई लड़ रहा 60 वर्षीय लाचार बुजुर्ग
मंडला l हीरापुर गांव के 60 वर्षीय बुजुर्ग प्रीतम रजक जिंदा हैं, सांस ले रहे हैं। चल-फिर रहे हैं, बोल भी रहे हैं, लेकिन सरकारी फाइलों ने दो साल पहले ही उनका अंतिम संस्कार कर उनकी तेरहवीं कर दी है l
एक सरकारी कलम ने एक जीते-जागते इंसान को कागजों में दफन कर दिया। जैसे ही सरकारी पोर्टल पर प्रीतम रजक को मृत घोषित किया गया। मानो उनके ऊपर दुखो का पहाड़ टूट गया। पिछले दो साल से न तो घर में सरकारी राशन आ रहा है और न ही वृद्धावस्था पेंशन खाते में जमा हो रही है। जिस उम्र में सहारा मिलना चाहिए था। उस उम्र में लाचारी ने घेर लिया है। सरकारी योजनाओं से वंचित प्रीतम अब खुद को जिंदा साबित करने के लिए सिस्टम के दरवाजों पर अपनी मौजूदगी की भीख मांग रहे हैं। लेकिन सिस्टम में बैठे अधिकारी आज भी एक रटा रटाया सा जवाब दे देते हैं कि मामला संज्ञान में आया है, जांच करवा रहे हैं और होता जाता कुछ नहीं है ,एक बुजुर्ग अपने आप को जिंदा साबित करने की लड़ाई लड़ते-लड़ते थक गया है l कहीं ऐसा ना हो कि वह अपने आप को जिंदा साबित करने की लड़ाई लड़ते-लड़ते जिंदगी की लड़ाई ही हार जाए l


