मरीज के परिजन से राज श्री मांगने वाले जननी एक्सप्रेस के ड्राइवर की सेवाएं समाप्त
   रायसेन- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दिनेश खत्री से प्राप्त जानकारी अनुसार विगत दिनों जिला अस्पताल में संलग्न जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस RJ14 PG 0818 के ड्राइवर द्वारा प्रसूता के परिजन से पैसे मांगने की जानकारी संज्ञान में आने पर उक्त जननी एक्सप्रेस के ड्राइवर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही संबंधित वेंडर के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। 

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20 रुपये की रिश्वत… 20 घंटे में न्याय… रिश्वत मांगने पर ड्राइवर की सेवाएं समाप्त...

हरीश मिश्र

     20 घंटे पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होता है। जननी एक्सप्रेस के एक ड्राइवर पर मरीज के परिजन से राजश्री के लिए 20 रुपये रिश्वत के रूप में मांगने का आरोप लगाया जाता है। वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खत्री तत्काल प्रभाव से उस ड्राइवर की सेवाएं समाप्त कर देते हैं।
     वीडियो में एक व्यक्ति पूछता है, "काय के पैसे दिए हैं, अब्बा आपने ?” अब्बा जवाब नहीं देते। तभी वही व्यक्ति ड्राइवर से पूछता है। ड्राइवर कहता है— “अंकल ने राजश्री के दिए।” सामने वाला व्यक्ति कहता है, “तुम्हारी राजश्री हम दिलवाएंगे, रुक जाओ।”और दिलवा भी दी—सेवा समाप्त कराकर। ( वीडियो के पहले कुछ हिस्सों में अपशब्दों का प्रयोग है, जिन्हें काट दिया गया है।  न्याय करने वाले अधिकारी ने शायद ध्यान नहीं दिया, न्याय करते समय एक-एक शब्द और भाव देखना चाहिए )
     यह सच है कि ड्राइवर ने गुनाह किया है। रिश्वत, रिश्वत होती है, एक रुपये की हो या एक करोड़ की। दराज में रखते हुए ली जाए या राजश्री के लिए, लिफाफा खुला लो या बंद,  कानून एक होना चाहिए, अंधा नहीं।
    सवाल यह है कि प्रदेश में ऐसा कौन-सा विभाग है, जिसके अधिकारी–कर्मचारी न्यौछावर नहीं लेते ? कुछ सेवा के नाम पर,कुछ अधिकार के नाम पर, कुछ डिजिटल,
कुछ काम हो जाने के बाद फूल नहीं, तो पंखुड़ी के रूप में लेते हैं,  लेकिन लेते अधिकांश हैं।
     इसी चिकित्सालय में 21 महीने पहले , सजा को समझाइश में बदलते देखा है। फिर यह कैसा न्याय?
सिर्फ 20 रुपये की रिश्वत पर इतनी बड़ी सजा ? क्या समझाइश नहीं दी जा सकती थी ? 
    यदि वायरल विडियो के आधार पर सजा देनी ही है, तो 5 अप्रैल 2024 को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की  पुनः  जांच होना चाहिए, डॉक्टर को भी सजा मिलनी चाहिए, जो एक गरीब ड्राइवर को मिली है ।
     जिसमें तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खत्री पर लिफाफा लेने के आरोप लगे थे। महिला डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था। डॉक्टर दो गुटों में बंट गए थे।  एक गुट जो प्राइवेट प्रैक्टिस करता था, दूसरा  लिफाफे लेता था।
   डॉ सुनीता अतुलकर, डॉ ज्योत्सना भीमटे, डॉ दीपक गुप्ता ने डॉक्टर खत्री पर" उंगली दिखाने, अधिनस्थों पर दबाव बनाने, भ्रष्टाचार करने, लिफाफे लेने और जूनियर होते हुए भी पैसे देकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बनने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। डॉ खत्री ने भी डॉक्टरों की अवैध प्राइवेट प्रैक्टिस पर सवाल उठाए थे ।
    जांच के नाम पर भोपाल से आई टीम ने दोनों पक्षों को बैठाकर आपस में तालमेल से रहने की सलाह दी, समझाइश दी “ऐसे मत लड़ो कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हों और विभाग की छवि धूमिल हो। तुम प्राइवेट प्रैक्टिस करो और तुम लिफाफे लो—लेकिन चुपचाप।” परिणाम प्राइवेट प्रैक्टिस जारी रही, लिफाफे चलते रहे, ऑपरेशन  नहीं हुआ। क्योंकि जिन पर आरोप थे, वे समझदार थे। उन्हें समझाया गया और वे समझ गए। लेकिन जब यही बात एक गरीब ड्राइवर पर आई, तो न किसी ने समझाया, न हिदायत दी। सिर्फ 20 रुपये के लिए उसकी सेवा ले ली गई।
विडंबना यह है कि सेवा समाप्त करने का आदेश डॉ. खत्री ने दिया, जिन पर स्वयं लिफाफे लेने के आरोप लग चुके।
    अपने पूर्व कार्यकाल में भ्रष्टाचार के कारण चर्चित रहे, विरोध और विवादों के चलते हल्की भूरी मिट्टी वाले जिले राजगढ़ में स्थानांतरित हुए।
लेकिन उनकी कुछ तमन्नाएं, ख्वाहिशें और सपने अधूरे थे। इसलिए भूरी मिट्टी से पुनः स्थानांतरित होकर 
काली मिट्टी की भूमि और काली कमाई के लिए चर्चित रायसेन में वे फिर लौट आए ... कुछ नई महक के साथ, कुछ नए इरादों के साथ, कुछ अलग कर दिखाने का जज़्बा लेकर।
लेकिन क्या एक आदेश से उन्होंने एक गरीब की बद्दुआएं नहीं ले लीं ? सिर्फ एक राजश्री के पीछे उसकी सेवाएं छीन ली गईं।
    यदि न्याय हो, इंसाफ हो, तो वह अधूरा नहीं होना चाहिए।
फिर पुरानी फाइलें भी खुलनी चाहिए। प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को भी दंड मिलना चाहिए और लिफाफे लेने वालों को भी।
माना कि कानून अंधा होता है,
लेकिन इस काली मिट्टी की भूमि में काली आंधी अब थमनी चाहिए। शिकायत मिलने पर, विडियो के आधार पर कार्रवाई की - डॉ दिनेश खत्री ( मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायसेन )

लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार )