"...बीते दस दिन विकास की घोषणाओं, परंपराओं के निर्वाह, राजनीति की मिठास और प्रशासनिक विरोधाभासों के बीच गुजरे। कहीं सौगातें बंटी, कहीं वादे दोहराए गए, तो कहीं व्यवस्था अपनी ही परछाइयों से जूझती नजर आई। मौसम की तरह ही सत्ता, सिस्टम और समाज का मिज़ाज भी इन दिनों बार-बार करवट बदलता रहा। "

                                                                 रायसेन जिले की दस दिन की घटनाओं का लेखा जोखा

दशगात्र

जब सत्ता मुस्कराई और व्यवस्था कराहती रही...

हरीश मिश्र

    बीते दस दिन किसी एक घटना के नहीं रहे, बल्कि मौसम, परंपरा, उत्सव, सौगात, घोषणाओं, प्रशंसा और हाईकोर्ट के आदेशों के बीच गुजर गए। कहीं विकास की जोरदार घोषणाएं हुईं, तो कहीं अभिनंदन में फूल बरसे। दिन में दिनकर की तपन रही, रात में ठंड ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। चांदनी रातों और ओस भरी भोर के बीच मौसम लगातार करवट बदलता रहा।
      रामलीला संपन्न हुई और परंपरा अनुसार रावण को अंतिम लकड़ी देने का अधिकार सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों को मिला। मकर संक्रांति पर नर्मदा और बेतवा के तटों पर स्नान के लिए जनसैलाब उमड़ा। हिन्दू सम्मेलनों में समरसता की पंगतों में सभी ने प्रसादी ग्रहण की।
    'विकसित भारत’ की राह पर रायसेन जिला एक कदम और बढ़ा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी,शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में रातापानी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में औबेदुल्लागंज–इटारसी सड़क चौड़ीकरण तथा देहगांव–बम्होरी मार्ग निर्माण के लिए 478 करोड़ रुपये की सौगात मिली। वहीं मंत्रिमंडल की बैठक में  मोहन यादव ( मुख्यमंत्री ) द्वारा रायसेन की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 502 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई। इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल और भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री का जोरदार अभिनंदन हुआ। अभिनंदन के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेताओं को एक सेल्फी के लिए धक्का खाते भी देखा गया।
     राजनीति में झूठ बोलकर कुछ नेता अपनी शान बढ़ा लेते हैं। झूठ का वादा अब राजनीति में कारोबार बन गया है—जो जितना बड़ा झूठ बोले वो उतना ही महान । ऐसे नेता जननायक बनकर आसमान छूते हैं; बस झूठ को प्यार से बेचने की कला आनी चाहिए। विदिशा में शिवराज सिंह चौहान ने बेहद मीठी बातें कहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि रायसेन में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा उन्होंने पांच साल पहले की थी और जनता ने उन्हें प्यार दिया, अब मेडिकल कॉलेज खुलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भी देर नहीं की और घोषणा कर दी—खुलेगा। घोषणा सुनकर चौकीदारों का मुंह खुला का खुला रह गया। मतलब, एक बार फिर प्यार से वादा कर दिया गया।

     सिविल सर्जन डॉ. यशपाल सिंह व्यवस्थाएं संभालने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ से तालमेल करते रहे, जबकि कंबलों के नीचे कॉकरोच मिलते रहे। भाग्य से ज्यादा तिकड़म पर भरोसा करने वाले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खत्री एक बार फिर जायपत्री का मीठा पान खाकर होंठ लाल करते, व्यवस्थाएं सुधारते, नजर आए। अब वह कॉकरोच पर हिट का इस्तेमाल करेंगे।पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मांडरे को हाईकोर्ट से स्थगन मिलने की खबर है, हालांकि आदेश की व्याख्या अभी शेष है। ऐसा सुनने में आ रहा है कि हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि 2 फरवरी को फैसला आएगा, तब तक बादल मंडराएंगे, बरसेंगे नहीं। कुल मिलाकर एक म्यान में दो तलवारें रहेंगी, डॉ. मांडरे की विदाई फिलहाल टल गई है। फिर से पतझड़ आ गया, आया ना बसंत। पलक झपकते हो जाएगा एक कथा का अंत।
    मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतें तालमेल और जुगाड़ से ‘फोर्स क्लोज’ कराने वाले स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कलेक्टर ने सराहना की। उधर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ के बीच टकराव जारी रहा। अस्पताल परिसर स्थित पुलिस चौकी पर नर्सों ने ताला जड़ दिया।
खेल विभाग में बच्चों को खिलाने के लिए बजट तो खूब आता है, लेकिन खेल अधिकारी नेताओं को रस्सी पकड़ा कर खेल-खेल में खेल बजट का पिंडदान कर रहे हैं। कृषि विभाग ने कुछ दिन पहले जैविक हाट शुरू किया है। अभी वहां ग्राहक नहीं पहुंच रहे, लेकिन विभाग किसानों के मुनाफे की मनोहर कहानियां प्रकाशित कर रहा है। अब नगर पालिका ने अतिक्रमण कर सड़क किनारे ठेला लगाने वालों के लिए रामलीला मैदान में जगह चिन्हित की है और अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई का मन बना लिया है। इंदौर घटना के बाद पेयजल की टंकियां पहली बार साफ की गईं। अच्छी खबर यह है कि एक ट्रक चालक देवदूत बनकर आया और जलती बस से 40 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। ताजपुर महल क्षेत्र में बिक रही अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं ने सड़क पर चक्का जाम किया और  प्रशासन ने गणतंत्र दिवस की तैयारी प्रारंभ कर दी हैं।

लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार )