छिंदवाडा़ l राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत परियोजना संचालक आत्मा, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग छिन्दवाडा एवं एन.आर.एल.एम. की निर्धारित मापदण्‍ड के अनुसार चयनित 40 कृषि सखियों/सी.आर.पी. के पांच दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन 24 से 28 सितंबर 2025 तक किया गया। जिसमें 27 सितंबर 2025 को कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह भी शामिल हुए और कृषि सखियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत छिन्दवाड़ा श्री अग्रिम कुमार तथा उप संचालक कृषि श्री जितेन्द्र कुमार सिंह,  वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कृषि विज्ञान केन्‍द्र प्रमुख डॉ.आर.एल. राउत एवं डीपीएम आजीविका मिशन श्रीमती रेखा अहिरवार भी उनके साथ थे।

         प्रशिक्षण के शुभारंभ में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राउत के द्वारा कलेक्टर श्री सिंह को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और प्रशिक्षण के बारे विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही प्रशिक्षण के उद्देश्यों के बारे में बताया गया। इसी क्रम में उप संचालक कृषि श्री सिंह के द्वारा प्राकृतिक खेती योजना एवं प्राकृतिक खेती से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी गई । साथ ही बताया गया कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव से मानव स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, जिससे कैंसर जैसी असाध्य बीमारी के रूप में सामने आ रही है। जिले के विकासखण्‍ड अमरवाड़ा,  हर्रई, परासिया, तामिया एवं जुन्‍नारदेव में कुल 20 क्‍लस्‍टर के कुल 2500 पंजीकृत कृषकों को ये प्रशिक्षित 40 कृषक सखियां स्‍वयं के खेत में प्राकृतिक खेती मॉडल बनाकर प्रशिक्षित करेंगी।

         मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री कुमार ने कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती मॉडल फार्म विकसित कर प्राकृतिक खेती की तकनीक को कृषकों के खेतों तक पहुंचाने एवं प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषकों को आत्‍म निर्भर बनाने के लिये प्रेरित करने हेतु निर्देश दिये।

        कलेक्टर श्री सिंह द्वारा कृषि सखियों को संबोधित करते हुये रासायनिक उर्वरकों एवं दवाइयों से स्‍वास्‍थ्य एवं मिट्टी पर होने वाले दुष्परिणाम से अवगत कराया गया। प्राकृतिक खेती करने से विषमुक्‍त अनाज, फल सब्जियां प्राप्‍त होंगे, जिससे मानव स्‍वास्‍थ्य एवं मृदा स्‍वास्‍थ्य में सुधार के साथ ही लागत में भी कमी आयेगी। प्राकृतिक खेती के उत्पादों को ग्रामीण स्तर पर मध्यान भोजन के लिये इस्तेमाल करवाने के साथ ही क्लस्टर के कृषकों के अलावा अपने आसपास के कृषकों को प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रोत्साहित करने के निर्देश दिये गये। उन्होंने बताया कि छिंदवाड़ा जिला प्राकृतिक खेती में प्रदेश में अव्‍वल जिला है। ये हमारी 40 कृषि सखियां, ध्‍वज वाहक के रूप में प्राकृतिक खेती को अपने क्षेत्र के किसानों के यहां प्रयोग करायेंगी।

        कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर श्री सिंह एवं जिला पंचायत सी.ई.ओ. श्री कुमार द्वारा कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किये गये एवं कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा प्रशिक्षण केन्द्र में लगाई गई प्राकृतिक खेती के लाईव यूनिट का निरीक्षण कर कृषक सखियों से प्राकृतिक घटक जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, बम्हास्त्र, दशपर्णी काढा आदि बनाने की विधि की जानकारी ली गई।  जिसमें कृषक सखी श्रीमती अनिता वर्मा एवं अन्‍य कृषक सखियों द्वारा सभी अधिकारियों को प्राकृतिक घटक एवं जैविक कीटनाशी के बारे में बताया गया।

        इस कार्यक्रम में उप परियोजना संचालक आत्‍मा श्रीमती प्राची कौतू, कृषि विज्ञान केन्द्र देलाखारी के वैज्ञानिक प्रशिक्षण नोडल अधिकारी डॉ.एस.के.अहिरवार की प्रशिक्षण की रूपरेखा एवं संचालन में विशेष भूमिका रही। सहायक संचालक कृषि श्री दीपक चौरसिया, अनुविभागीय अधिकारी कृषि श्री प्रमोद सिंह उट्टी,  कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. नीलकमल पन्द्रे, श्री राकेश मेश्राम, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री योगेश उइके, आत्मा का मैदानी अमला बीटीएम श्री अमित बघेल, एटीएम श्री योगेश चोपडे, श्री पंकज पराडकर, श्री गोविंदा बिहारे, एटीएम श्री सुशील जंघेला, प्रखर रहांगडाले, नवोदित झरबडे, विनय इंगोले, रोहित डेहरिया, कृषक श्री दुर्गशा कवरेती, श्री हरमितशा, श्री कमलसा धुर्वे उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में एन.आर.एल.एम. के सहयोगी श्रीमती सुरभि बागियार, ब्लॉक प्रबंधक श्री देवेन्द्र बर्डे, श्री श्यामसिंह चौधरी, श्रीमती सुनीता मसानी, श्री ओमप्रकाश पाण्डेय एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं का विशेष सहयोग रहा।