छिंदवाडा़ जिले के विकासखंड तामिया में कृषि विज्ञान केन्द्र देलाखारी द्वारा बिरसा मुण्डा जी की 150वीं जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा एवं किसान मेले का आयोजन पातालकोट के ग्राम बीजाढाना में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.आर.एल.राऊत के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के संचालक विस्तार सेवाएँ डॉ.टी.आर.शर्मा एवं विशिष्ठ अतिथि उप संचालक कृषि छिन्दवाड़ा श्री जितेन्द्र कुमार सिंह थे। कार्यक्रम में पातालकोट के भारिया जनजाति के अलावा गोंड, कोरकू आदि जनजातियों के आदिवासी कृषकों एवं महिलाओं ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के अध्यक्षीय उ‌द्बोधन में संचालक डॉ.शर्मा द्वारा किसानों के विकास के लिए अपनी खेती का विकास करने की सलाह दी गई। ज्यादा लागत चाहने वाली फसलों की तुलना में कम खर्च वाली एवं अधिक उत्पादन (आय) देने वाली फसलों की खेती करने एवं परम्परागत फसलों जैसे जगनी, कोदो, कुटकी, रागी आदि की खेती करने की सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि इन फसलों की मांग ज्यादा है एवं प्राकृतिक उत्पादन की क्षमता तामिया पातालकोट जैसे क्षेत्रों में अधिक है। उन्होंने अपने उद्बोधन में महान क्रांतिकारी जनजाति नेता बिरसा मुण्डा जी के देश की स्वतंत्रता में योगदान को याद किया एवं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

        उप संचालक कृषि श्री सिंह ने आदिवासी कृषकों को कृषि के विभिन्न योजनाओं में बढ़-चढ़ कर भाग लेने का आह्वान किया एवं कहा कि कृषि विभाग का अमला हमेशा आपके साथ है, कोदो-कुटकी की शासन द्वारा खरीदी के लिये चलाये जा रहे रजिस्ट्रेशन की जानकारी दी एवं उसमें 10 रूपये प्रति कि.ग्रा. प्रदाय किये जा रहे अतिरिक्त सहायता राशि की जानकारी प्रदान की। जिले में चिया सीड की फसल की संभावनाओं पर प्रकाश डाला एवं उसके उत्पादन एवं मूल्य पर जानकारी दी। उप संचालक कृषि श्री सिंह ने बताया कि तामिया, हर्रई, जुन्नारदेव, अमरवाड़ा की पथरीली भूमि में प्रति एकड़ किसान कुल 40 से 50 हजार रूपये प्रति एकड़, खर्च काटकर कमा सकता है। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ.आर.एल.राऊत ने आदिवासी किसान भाई-बहनों से आगृह किया कि अपने विकास के लिए अपने बच्चों को शिक्षित करें उन्हें स्कूल भेजें, अपने परिवार को स्वस्थ रखने के लिए व्यसनों एवं कुरीतियों से दूर रहें। शिक्षा के प्रभाव से कृषि में तकनीक का उपयोग कर अपनी खेती से अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने हल्की पथरीली जमीन पर मक्का के स्थान पर जगनी लगाने की सलाह दी, ताकि कम से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। उन्होंने मुर्गियों की अधिक अण्डा (200 प्रति वर्ष) देने वाली प्रजातियों नर्मदा निधि, वनराजा, ग्रामप्रिया, कृष्णा-जे आदि की जानकारी प्रदान की, बकरी की उन्नत नस्लें जमुनापारी, बरबरी, सिरेसी को पालने की एवं इनके रहने के लिये उन्नत आवास के बार में कृषकों को जानकारियां प्रदान की। उन्होंने कृषकों के खेतों में लगातार आय के लिये फलदार वृक्षों आम, अमरूद, सीताफल, अनार, मुनगा, नीबू आदि लगाने की सलाह दी।

       कृषि विज्ञान केन्द्र चंदनगांव छिन्दवाड़ा के प्रभारी डॉ.रूपेन्द्र झाड़े ने कृषकों को कम लागत वाली तकनीक एवं प्राकृतिक खेती के अनुकरण की बात कही। उन्होंने कृषि क्षेत्र में हो रहे नये प्रयोगों के बारे में किसानों को बताया। किसानों से आगृह किया कि बिरसा मुण्डा जी को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए अपने जीवन स्तर को अच्छा बनाना होगा और यह अच्छी खेती से संभव होगा। कृषि विज्ञान केन्द्र देलाखारी के वैज्ञानिक डॉ.एस.के.अहिरवार ने प्राकृतिक खेती के मुख्य आधार जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रम्हास्त्र मल्विंग, वाप्सा के बारे में जानकारी दी, जिससे बिना बाजार से खाद एवं रासायनिक दवाइयां खरीदे खेती से अच्छा उत्पादन किया जा सके। कार्यक्रम में क्षेत्र की जनपद सदस्य श्रीमती वैजन्ति पंद्राम, ग्राम हर्राकछार की सरपंच श्रीमती सुनवती कुड़ोपा, सरपंच रातेड़ श्री रमेश भारती, उप सरपंच श्रीमती कलशवती टेकाम, परार्थ समिति से श्री धारासिंह डेहरिया, श्री रामदास नागरे आदि की उपस्थिति सराहनीय रही एवं विशेष सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ.नीलकमल पन्द्रे, सुश्री सरिता सिंह, डॉ.नीलकमल पन्द्रे, डॉ.एस.एल.अलावा, श्री नितेश गुप्ता, श्री चंचल भार्गव, श्री राकेश मेश्राम आदि ने कार्यकम व्यवस्था बनाने में सहयोग प्रदान किया। रातेड़ से आये भारिया जनजाति की महिलाओं ने परम्परागत नृत्य सेतम से कार्यक्रम का समापन किया।