खण्डवा के खानशाहवली क्षेत्र के निवासी सैयद वसीम रजा लगभग 5 माह पूर्व घोड़े का एक बच्चा लाए और उसका नाम “कबीर” रखा। घर में बच्चे की तरह कबीर का लालन पालन हो रहा था, और घर के सभी सदस्य उसे बच्चे जैसा दुलार करते। कुछ दिन पूर्व कबीर को जुएं पड़ गए। रविवार शाम को वसीम ने मेडिकल स्टोर से जुंआ नाशक दवा लाकर कबीर के शरीर पर दवा लगा दी। वसीम ने दवा तो लगा दी, लेकिन वह कबीर के मुंह को कवर करना भूल गया। कबीर ने अपने शरीर पर लगी जुंआ नाशक विषैली दवा चाटना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में विषैली दवा ने असर दिखाया और कबीर को बैचेनी होने लगी और वह लोटपोट होने लगा और उसके मुंह से झाग आने लगे। घर के सदस्यों ने यह सब देखा, तो घबरा गए। 

                वसीम को इसकी खबर लगी तो वह तुरंत घर आया और 1962 पर फोन लगाकर पशुओं के उपचार हेतु उपलब्ध शासन की एम्बुलेंस सुविधा के लिए कॉल किया। कुछ ही देर में पशु चिकित्सक डॉ. कौस्तुभ त्रिवेदी एम्बुलेंस सहित अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपना इलाज शुरू किया। डॉ. त्रिवेदी ने एम्बुलेंस पैरावेट स्टाफ सुश्री विधि पटेल, एवं अटेण्डेंट श्री नीलेश विश्वकर्मा के सामूहिक प्रयासों से लगभग आधे घंटे के उपचार के बाद कबीर को आराम मिलना शुरू हो गया और धीरे धीरे वह बिल्कुल स्वस्थ हो गया। वसीम और उसका परिवार कबीर की जान बचाने के लिए पशु चिकित्सक डॉ. त्रिवेदी और उनके सहयोगी स्टाफ की सराहना करते नहीं थकते हैं। पशु चिकित्सा हेल्पलाइन 1962 सुविधा के लिए वसीम और उनके परिवारजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बार बार आभार प्रकट करते हैं।