नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बदनाम करने को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। इथनॉल मामले में गडकरी को बदनाम करने के लिए  एक विदेशी फर्म को हायर किया गया था। फेक अकाउंट बनाकर झूठी खबर प्लांट की गई भारत में और  यूट्यूबर्स से लेकर नेता ताबड़तोड़ उसको लेकर एक्स पोस्ट और वीडियो बना रहे थे। फेक अकाउंट बनाकर बांग्लादेशी फर्म ने मोदी सरकार की छवि को खराब करने की साजिश रची थी। दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में घोषणा की कि भारत आने वाले महीनों में ईंधन में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लेगा। जब से भारत में इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध हुआ है, तब से विभिन्न प्रकार की नकारात्मक चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है। ऐसा कहा जाता है कि इथेनॉल वाहन के इंजन को प्रभावित करता है और ईंधन दक्षता या माइलेज को भी कम करता है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि आम लोगों में भ्रांतियाँ फैलाई गई हैं। अब तेल कंपनियों और उद्योग समूहों ने इस संबंध में अहम बयान दिया है। उन्होंने साफ़ तौर पर बताया है कि इथेनॉल का वाहनों पर क्या असर होगा। नितिन गडकरी का एक बेटा है और उसका एथनॉल की कंपनी में शेयर है। इसलिए इथनॉल को पेट्रोल में मिक्स किया जा रहा है। लेकिन जिस कंपनी के बारे में बताया गया उस कंपनी में नितिन गडकरी के बेटे का शेयर .06 % है। वो कंपनी भारत की टॉप इथनॉल पर्सेचिंज कंपनी में भी नहीं आती। 20  प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण से हमारे देश को हर साल 80 बिलियन डॉलर बचेगा। जो विदेशी कंपनियां भारत को हर साल 80 बिलियन डॉलर का तेल बेचती थी, उनके धंधे पर असर पड़ेगा। ऐसे में ऑयल माफियाओं ने देश में दुष्प्रचार फैलाना शुरू किया। जैसे नितिन गडकरी बेटे की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए फैसला लिया। इसके अलावा कहा गया कि इथनॉल वाले तेल से गाड़ी का माइलेज कम हो जाएगा।