भोपाल । मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा आज दिंनाक श्रम विधियों (संशोधन) और प्रकीर्ण उपबंध विधेयक 2025 का अनुमोदन किया गया, जिसके तहत ठेका श्रम विनियमन और उत्सादन अधिनियम 1970, कारखाना अधिनियम 1948 तथा औद्यौगिक विवाद अधिनियम 1947 में संशोधन किये गये हैं। इस संशोधन के माध्यम से ठेका श्रम अधिनियम 1970 में लाइसेंस लेने की बाध्यता 50 से अधिक कर्मकारों को कार्य पर रखने वाले ठेकेदारों पर भी लागू होगी, जबकि पहले 20 से ज्यादा कर्मकार कार्यरत होने पर अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) लेने की आवश्यकता रहती थी। कारखाना अधिनियम को छोटे कारखानों पर बंधनकारी न करते हुये श्रम नियमों में सरलीकरण किया गया है। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत जहां तालाबंदी के पूर्व सूचना देने का नियोजक पर पूर्व बाध्यता मात्र लोक उपयोगी सेवाओं के लिए था। इसको व्यापक करते हुये सभी प्रतिष्ठानों पर लागू किया गया है। जिसके साथ-साथ कर्मकारों को भी पूर्व सूचना देने की बाध्यता सभी औद्योगिक स्थापनाओं के लिए आवश्यक किया गया है। यह सभी संशोधन नियमानुसार माननीय राष्ट्रपति महोदया की सहमति के लिए प्रेषित किये जायेंगे तत्पश्चात यह राज्य में कानून का रूप लेंगे।

इन संशोधनों के पारित होने से एक ओर जहां लाइसेंसिग की आवश्यकता में कमी आयेगी वहीं छोटे एवं लघु उद्यमी लाइसेंसिंग से मुक्त होंगे व अधिक से अधिक श्रमिकों को नियोजित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इन संशोधनों से कर्मकारों के वेतन-भत्ते, ओवर टाईम आदि में कोई भी बदलाव नहीं होगा एवं उनके सभी अधिकार सुरक्षित रहेंगे। संशोधन से सौहार्दपूर्ण औद्योगिक वातावरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ज्यादा श्रमिकों को रोजगार प्राप्त होने में तथा राज्य के विकास को गति मिलने में सहायता मिलेगी।

विधानसभा में श्रम मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने यह स्पष्ट किया कि विधेयक पारित होने से कर्मकारों की अभिव्यक्ति या अन्य किसी भी अधिकार में किसी तरह का विपरीत प्रभाव नहीं होगा, बल्कि सौहार्दपूर्ण वातावरण के लिए आवश्यक पारदर्शी सूचना का आदान-प्रदान हो सकेगा। यह संशोधन लाईसेंसिंग राज को खत्म करने में एवं राज्य में सौहार्दपूर्ण तथा प्रतिस्पर्धात्मक उद्योग स्थापित करने एवं अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार के अवसर प्रदान करने में उपयोगी सिद्ध होगें। श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा सदन को यह आश्वस्त किया गया कि नवीन टेक्नोलॉजी एवं नवाचारों का उपयोग करते हुये प्रदेश में श्रमिकों के हितों का संरक्षण किया जाएगा।