रामचरित मानस की तर्ज पर अब गाया भी जा सकेगा संविधान
नई दिल्ली। संविधान का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में कठिन भाषा और मोटी किताब की छवि उभरती है, लेकिन अब भारत का संविधान रामचरित मानस की तरह गाया, समझा और आसानी से याद किया जा सकेगा। पहली बार देश के संपूर्ण संविधान को दोहा, रोला और विभिन्न छंदों में पिरोया गया है। भारत सहित नेपाल, इंडोनेशिया, सिंगापुर और कुवैत आदि देशों के 142 रचनाकारों ने मिलकर इस महाग्रंथ को काव्य के रूप में सृजित किया है, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है।


