सोम डिस्टलरी में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी: महालेखाकार की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं उजागर
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हरीश मिश्र ( 9584815781 )
सोम ग्रुप हमेशा अपने उपभोक्ताओं को सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने की गारंटी प्रदान करता है। ग्रुप अपने उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों और विशिष्टताओं को बनाए रखने के प्रति संकल्पबद्धता दर्शाता है । ग्रुप का दावा है कि उसने उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निरंतर शोध किए हैं। गुणवत्ता निगरानी के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशाला निर्माण का दावा भी करता है।
जबकि लेखापरीक्षा महालेखाकार, ग्वालियर ने सहायक आबकारी आयुक्त, रायसेन के दस्तावेजों का अध्ययन के बाद खुलासा किया है कि एफ एल 9 इकाई, सोम डिस्टलरी प्रा.लि. सेहतगंज, जिला रायसेन ने विदेशी , देशी मदिरा, आर एस/ ई एन ए, बीयर के रासायनिक परीक्षण संबंधित प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता की थीं।
मध्य प्रदेश विदेशी मदिरा नियम, 1996 के नियम 6 (3), देशी स्प्रीट नियम 1996 के नियम 3-घ- ( 3 ) , आसवनी नियम 1965 के नियम 4 ( 3 )
अनुज्ञप्तिधारी परिसर में अपनी निजी प्रयोगशाला स्थापित करेगा तथा तकनीकी योग्यता प्राप्त 1 केमिस्ट नियुक्त करेगा।
बोतल भराई के लिए तैयार निर्मित मदिरा के प्रत्येक बैच के नमूने का प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाएगा। जब नमूने की मदिरा मानव उपभोग के लिए उपयुक्त पायी जाएगी । तभी बैच जारी करने की अनुमति दी जाएगी ।
ऐसे प्रत्येक रासायनिक परीक्षण की रिपोर्ट की एक अभिप्रमाणित छायाप्रति भार साधक अधिकारी को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। विनिर्माण इकाई के भारसाधक के पर्यवेक्षण में और उपस्थिति में नमूनों को निकाला जाएगा।
एफ एल 9 इकाई, सोम डिस्टलरी प्रा.लि. सेहतगंज, जिला रायसेन ने विदेशी, देशी मदिरा, आर एस/ ई एन ए, बीयर
के वर्ष 2016-17 से 2018-19 के मध्य बैचों का निर्माण किया गया था। संधारित अभिलेखों की नमूना जांच में पाया गया की निर्माण इकाई के भारसाधक अधिकारी की उपस्थिति में नमूनों को नहीं लिया गया था । इस सम्बन्ध में कोई टीप भारसाधक अधिकारी की डायरी डी-21 में नहीं पाई गयी ।
पूर्ण रासायनिक परीक्षण की रिपोर्ट के स्थान पर केवल प्रमाण पत्र अभिलेख में संलग्न पाए गए, जिसमे अल्कोहल को मानव उपभोग हेतु फिट घोषित किया गया था। जबकि नियमानुसार हर बैच का रसायनिक परीक्षण किया जाना चाहिए था । जिसका कोई प्रमाण अभिलेखों में प्राप्त नही हुआ है। इस सम्बन्ध में इकाई के भार साधक अधिकारी द्वारा भी कोई कार्यवाही नही की गई एवं केवल प्रमाण पत्र के आधार पर ही बोतल भराई की अनुमति सोम डिस्टलरी को प्रदान की गयी।
जो विधि विरुद्ध थी एवं तैयार मदिरा मानव शरीर के लिए हानिकारक थी ।
रासायनिक परीक्षण की रिपोर्ट के स्थान पर उपलब्ध कराये गए प्रमाण पत्र की निर्माण इकाई के भार साधक अधिकारी को उपलब्ध कराये जाने की दिनांक की पुष्टि भार साधक अधिकारी के हस्ताक्षर सहित दिनांक / अन्य अभिलेख (आवक डायरी आदि) में नही पाई गई थी। जबकि रासायनिक परीक्षण नियमित रूप से कराया जाना चाहिए था । जो डी-21 डायरी में परीक्षण से संबंधित टीप अंकित नहीं पाई गई थी।
आबकारी अधिनियम अनुसार 50 लीटर से ज्यादा शराब पकड़े जाने के मामलों में पुलिस एक्साइज एक्ट की धारा 34 (2) के तहत केस बनाती है। सोम डिस्टलरी में तो हजारों लीटर विदेशी , देशी मदिरा, आर एस/ ई एन ए, बीयर बिना रासायनिक परीक्षण के खुले बाजार में भार साधक अधिकारी से मिली भगत कर बेच दी और कोई कार्रवाई नहीं की गई।