प्रदोष का व्रत करने से शनि के प्रकोप से मिलता है छुटकारा
प्रदोष व्रत करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोषों से मुक्ति मिलती है। साथ ही भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत करने से जातक के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल यानी की सूर्यास्त के बाद की जाती है। इसलिए पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और फिर साफ कपड़े पहनें। अब पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और फिर हाथ में जल कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव का जल, गंगाजल या फिर पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शिवलिंग को चंदन लगाएं और धतूरा, बिल्व पत्र, भांग और मदार के फूल आदि अर्पित करें।
फिर मां पार्वती और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। इसके बाद धूप-दीप करें और शिव मंत्रों का रुद्राक्ष माला से जाप करें। प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और पूजा के अंत में भगवान शिव और मां पार्वती की आरती करें। शिव पूजन के बाद पीपल के पेड़ के नीचे या फिर शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनिदेव को काले तिल और तेल चढ़ाएं।


