ज्ञान, विज्ञान का उत्सव बना कृषि महोत्सव - केंद्रीय मंत्री चौहान
रायसेन ( हरीश मिश्र 9584815781) राष्ट्रीय कृषि मेला महज़ एक आयोजन नहीं, बल्कि बदलती खेती की दिशा का जीवंत संकेत बनकर उभरा है। दूसरे दिन एक लाख से अधिक किसानों की उपस्थिति यह बताती है कि अब किसान केवल परंपरा के सहारे नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान और नवाचार के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए जिस सहजता से मेले को “किसानों के सीखने का मंच” बताया, वह इस आयोजन की असली आत्मा को रेखांकित करता है। 300 से अधिक स्टॉलों पर सजे आधुनिक कृषि यंत्र, उन्नत बीज और वैज्ञानिक तकनीकें केवल प्रदर्शन नहीं हैं , बल्कि उस परिवर्तन की झलक हैं, जिसकी ओर भारतीय कृषि धीरे-धीरे अग्रसर है।
रायसेन की मिट्टी में जिंक की कमी का तथ्य सामने आना और उस पर मंत्री द्वारा संतुलित उर्वरक प्रबंधन की सलाह देना इस बात का प्रमाण है कि अब खेती अनुभव से आगे बढ़कर विज्ञान पर आधारित हो रही है। यह बदलाव छोटा नहीं है—यह वही बिंदु है जहां किसान ‘अनुमान’ से निकलकर ‘विश्लेषण’ की ओर कदम बढ़ाता है।
दलहनी फसलों और बागवानी की ओर रुख करने की सलाह भी केवल फसल परिवर्तन नहीं, बल्कि आय और स्थायित्व के नए समीकरण की ओर संकेत है। यह स्वीकार करना होगा कि पारंपरिक फसलों पर निर्भरता अब जोखिमपूर्ण होती जा रही है और विविधता ही भविष्य का सबसे बड़ा सहारा बन सकती है।
सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि मेले में पहुंचे किसानों ने केवल देखा नहीं, बल्कि समझने और अपनाने की इच्छा भी दिखाई। यह जिज्ञासा ही वह शक्ति है, जो भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बना सकती है।
यह मेला एक उदाहरण है कि जब ज्ञान , विज्ञान और किसान एक मंच पर आते हैं, तो बदलाव केवल नीतियों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने लगता है। यह आयोजन आने वाले समय में कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो सकता है।
पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री, सांची विधायक डॉ प्रभु राम चौधरी,भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा, पूर्व मंत्री रामलाल सिंह राजपूत उपस्थित रहे।


