ब्राह्मणों के दबदबे वाला विधानसभा क्षेत्र है नर्मदापुरम

नर्मदापुरम l मध्यप्रदेश की लाइफ लाइन पुण्य सलिला मां नर्मदा के तट पर स्थित नर्मदापुरम विधानसभा क्षेत्र मध्यप्रदेश का एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जिसमें नदियों पर सर्वाधिक छह ब्रिज बने हुए हैं, तीन ब्रिज रेल्वे मार्ग पर हैं तो तीन ब्रिज सड़क मार्ग पर बने हुए है, 2003 के पहले इटारसी और होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम ) अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र हुआ करते थे l परिसीमन के बाद अब इटारसी और नर्मदापुरम 2003 से एक ही विधानसभा क्षेत्र नर्मदापुरम का हिस्सा है वही सोहागपुर अलग विधानसभा क्षेत्र बन चुका है। ब्राह्मण समाज के दबदबे वाले इस विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में डॉ सीताशरण शर्मा विधायक है ,वह तीन बार इटारसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं और दो बार नर्मदापुरम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। डॉ शर्मा 1990 ,1993 और 1998 में इटारसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं वही भाजपा जिला अध्यक्ष रहे गिरजाशंकर शर्मा भी नर्मदापुरम से दो बार विधायक रहे हैं। डॉ सीताशरण शर्मा 2013 में मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष भी बने थे। इनके पहले मधुकरराव हर्णे भी मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे थे । हर्णे ने नर्मदापुरम विधानसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व किया था । नर्मदापुरम विधानसभा में अगर विकास की बात करें तो यहां दो आईटीआई है, दो पॉलिटेक्निक कॉलेज है एक एग्रीकल्चर कॉलेज है ,ला कालेज की बिल्डिंग बन रही है। यहां रेलवे के चार आरओबी हैं। एक आरओबी का काम लगभग पूर्ण होने की ओर है वही एक आरओबी का काम शुरू होना शेष है । इस विधानसभा में 2 राइस स्कूल आए हैं । कई विकास के कार्य अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों एवं शहर के विभिन्न वार्ड में जारी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र बुधनी से नर्मदापुरम की दूरी मात्र 7 किलोमीटर है ,2018 के विधानसभा चुनाव में डॉ सीताशरण शर्मा ने अपने ही राजनैतिक गुरु पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे वरिष्ठ नेता सरताज सिंह को पराजित किया था। इस चुनाव में सरताज सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर टिकट को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। यदि पुराने नेताओं की बात करें तो उनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा और मुख्यमंत्री के बाल सखा तथा सामान्य वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष शिव कुमार चौबे । यह तीन नाम सामने आते हैं और अगर नई पीढ़ी की बात करें तो पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल, प्रसन्ना हर्णे, ,पूर्व मंडी अध्यक्ष, 10 साल तक जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक मैं संचालक रहे मध्यप्रदेश तैराकी संघ के अध्यक्ष पीयूष शर्मा ,जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे भरत सिंह राजपूत और एक और सबसे ज्यादा चर्चित नाम है डॉ राजेश शर्मा का । महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष माया नारोलिया पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष भी रही है और पुरुष दावेदारों में अगर सामंजस्य नहीं बना तो माया नारोलिया का दावा भी बन सकता है। दूसरी तरफ कांग्रेस में भी पूर्व विधायक सविता दीवान, ,पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मीना वर्मा, पूर्व जिला अध्यक्ष कपिल फौजदार, चंद्र गोपाल मलैया समेत कई अन्य दावेदार भी है। इटारसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे विजय दुबे उर्फ काकू भाई को भी मध्य प्रदेश सरकार में उपमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ था । सविता दीवान यहां से पूर्व में विधायक रह चुकी है वह मात्र 15 वोटों से विधानसभा का चुनाव जीती थी वही पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मीना वर्मा का दावा भी मजबूत है विषम परिस्थितियों के बावजूद भी वे कठिन मोर्चे पर डटी रहती हैं। वर्तमान में नगर पालिका चुनाव में भी उनके वार्ड से भाजपा प्रत्याशी की उनसे ही मुकाबले में जमानत जप्त हो गई थी। कपिल फौजदार कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रहे हैं और यह कांग्रेस का पुराना परिवार है जिससे उनके दावे को भी कमजोर नहीं आंका जा सकता। कभी-कभी कुछ और अटकलें भी लगाई जाने लगती है पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के नर्मदापुरम दौरे के बाद से ही यकायक पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का नाम भी नर्मदापुरम विधानसभा के लिए चर्चा में आ गया था वही पिछली बार की तरह ही इस बार भी पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा फिर चर्चा में बने हुए हैं राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही है कि यदि शर्मा परिवार को भाजपा से टिकट नहीं मिलती है तो वह कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ सकते हैं वहीं एक अन्य अटकल भी चल रही है कि सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक विजयपाल सिंह नर्मदापुरम से टिकट ले सकते हैं। फिलहाल अटकलों का दौर जारी है। नर्मदापुरम जिले में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी कांग्रेस पार्टी के टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वही भारतीय जनता पार्टी की टिकट वितरण में मुख्यमंत्री के निज सहयोगी एवं सामान्य वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष शिव कुमार चौबे की राय भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।