बागी विधायकों ने उड़ाई पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नींद
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी सियासी उठा-पटक के बीच पार्टी के 58 बागी विधायकों ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रथीन बोस को पत्र सौंपकर ऋतुब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता मान्यता देनेइस शक्ति प्रदर्शन के बावजूद बागी विधायकों ने पत्र में ममता बनर्जी को ही पार्टी की नेता और सभानेत्री बताया है, जिससे संकेत मिला है कि उनका विरोध सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर है।विधानसभा सूत्रों के अनुसार स्पीकर ने पत्र स्वीकार कर लिया है, हालांकि अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी हस्ताक्षरों का सत्यापन कराया जाएगा। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर जल्द फैसला हो सकता है।तृणमूल में मौजूदा संकट की शुरुआत विपक्ष के नेता पद के लिए वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय के समर्थन में भेजे गए एक पत्र से हुई थी। आरोप लगा कि उस पत्र में कई विधायकों के हस्ताक्षर जाली थे। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस और सीआईडी जांच कर रही है तथा कई विधायकों से पूछताछ की जा चुकी है।
इसी विवाद के बाद ऋतुब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद कई विधायक खुलकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सामने आए और बागी खेमे का आकार लगातार बढ़ता गया। इसके साथ ही तृणमूल में संभावित विभाजन और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं। बागी विधायक अरुणाभ सेन ने कहा, 'मैं आज भी ममता बनर्जी को अपना नेता मानता हूं, लेकिन अभिषेक बनर्जी को कभी नेता नहीं माना और न ही मानूंगा।


