30 दिन के पैसे लेकर 28 दिन का रिचार्ज खुली लूट नहीं तो और क्या है ..?
नई दिल्ली । भारत में टेलिकॉम कंपनियों द्वारा ग्राहकों के साथ धोखा किया जा रहा है। रिचार्ज कूपन को “एक महीने” की वैधता का बताकर बेचा जाता है जबकि वास्तव में उसकी अवधि केवल 28 दिनों की होती है। 30 दिन के पैसे लेकर 28 दिन की सेवा देना उपभोक्ता के साथ सीधा अन्याय है। जबकि पूरी दुनिया में महीना 30 या 31 दिनों का होता है।एक साल में 12 महीने होते हैं, वहीं 28 दिनों की वैधता के चलते ग्राहक को 12 की जगह 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है। यानी बिना किसी अतिरिक्त सेवा के टेलिकॉम कंपनियां ग्राहकों से एक महीने का अतिरिक्त पैसा वसूल लेती हैं। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने भी समय-समय पर यह निर्देश दिए हैं कि कम से कम कुछ रिचार्ज प्लान 30 दिनों की वैधता के साथ उपलब्ध कराए जाएं, लेकिन ये निर्देश केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। इन निर्देशो को अमली जामा पहनाने वाला कोई नहीं है l इतना ही नहीं हमने यदि 28 दिन का रिचार्ज कराया है तो उस रिचार्ज में नेट का चार्ज भी शामिल रहता है l कुछ एसएमएस भी दिए जाते हैं और कॉलिंग भी रहती है परंतु यदि हमने इन 28 दिनों में ना तो कोई कॉल किया ,ना ही एसएमएस किया और ना ही इंटरनेट सेवा का लाभ लिया फिर भी जैसे ही 28 दिन पूरे होते हैं और हमारा सारा बैलेंस शून्य हो जाता है और फिर कराईए 28 दिन के लिए रिचार्ज परंतु उसमें पिछला शेष बैंलेस नहीं जोड़ा जाता वो लेप्स हो जाता है l यह एक बहुत बड़ी सुनियोजित लूट है ,जिस पर कोई नियंत्रण नहीं है l



