शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बन जाते लेकिन...
शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बन जाते लेकिन...
- दिलीप पाण्डेय
शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर के एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार से आते हैं । उनके पिता शिशिर अधिकारी भी मेदिनीपुर के कद्दावर नेता रहे थे । शुभेंदु पहले ममता के ही सिपाही थे लेकिन 2020 के बाद वो बीजेपी में आए और उन्होंने अपनी एक हिंदू जननायक की छवि बनाई ।
साल 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से करीब 1900 वोटों से हराया और साल 2026 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर 15000 से ज्यादा वोटों से हराया ।
इस तरह ममता बनर्जी के पूरे किले को ढहाने में शुभेंदु अधिकारी और उनके कैडर का बहुत अहम रोल रहा है और वो पश्चिम बंगाल के अंदर मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं । लेकिन दो मुसीबतें हैं जिनकी वजह से उनके मुख्यमंत्री पद के बीच चुनौतियां हैं..
सबसे पहली वजह... शुभेंदु अधिकारी की उम्र 55 साल है और योगी आदित्यनाथ 53 साल के हैं । योगी आदित्यनाथ को अक्सर उनके विरोधी अजय सिंह बिष्ट कहते हैं । योगी जन्म से राजपूत हैं और कर्म से ब्राह्मण । फिर भी एक ब्राह्मण होने के बावजूद भी शुभेंदु अधिकारी ने मंच पर पूरी दुनिया के सामने योगी आदित्यनाथ को दंडवत प्रणाम किया । इससे ब्राह्मणों और राजपूतों में भेदभाव करने वालों को तो जवाब मिल ही गया लेकिन ये तस्वीरें अमित शाह को बिलकुल भी नहीं पसंद आई होंगी जिनके ऊपर पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री चुनने का मुख्य जिम्मा है । हर जगह अमित शाह ने अपनी पसंद के मुख्यमंत्री नियुक्त किए हैं जो प्रधानमंत्री उम्मीदवारी में कल को उनका साथ दें ।
दूसरी सबसे बड़ी वजह... साल 2024 में शुभेंदु अधिकारी ने मोदी के सबका साथ और सबका विकास नारे का विरोध किया था । शुभेंदु अधिकारी ने खुले मंच से कहा था कि जिसका साथ उसी का विकास । ये सीधे मुस्लिम तुष्टीकरण करने वाले नरेंद्र मोदी को एक खुली चुनौती की तरह ही था । आज कल उनका ये बयान बहुत ज्यादा वायरल हो रहा है । जब ये नारा प्रधानमंत्री मोदी ने दिया तो सबसे पहले इसका विरोध पूज्य आचार्य श्री धर्मेंद्र जी महाराज ने ये कहकर किया था कि सांप बिच्छुओं का साथ और सांप बिच्छुओं का विकास ये नारा गलत है नारा ये होना चाहिए.... देशभक्तों का साथ देशभक्तों का विकास ।
अब देखते हैं कि आगे क्या होता है... ये निम्नलिखित लोग भी सीएम पद के उम्मीदवार हो सकते हैं...
दिलीप घोष
सुकांत मजूमदार
समित भट्टाचार्य
महिलाओं में...
अग्निमित्रॉ पॉल
रूपा गांगुली
देखते हैं आगे क्या होता है... पार्टी के मालिक मोदी और शाह हैं जो तय करेंगे वही सब मान लेंगे । लेकिन हिंदुत्ववादी ताकतें इस वक्त शुभेंदु अधिकारी के साथ ज्यादा खड़ी नजर आ रही हैं क्योंकि वो खुलकर कह चुके हैं कि उनको मुसलमानों ने वोट नहीं दिया तो वो हिंदुओं के लिए ही काम करेंगे ।
- दिलीप पाण्डेय
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