(हरीश मिश्र)  पश्चिम एशिया में लंबे खिंचते युद्ध को देखते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने और कालाबाजारी व जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है। यह पहल सराहनीय है।
लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है।
सरकार को  आगे बढ़कर उदाहरण भी प्रस्तुत करना होगा।
     मंत्रियों के काफिलों में सरकारी वाहनों की संख्या घटाई जाए, रैलियों, सम्मेलनों और उद्घाटनों पर तत्काल रोक लगे या वर्चुअल हों ।  क्योंकि इन आयोजनों में सिर्फ मंच नहीं सजते, हजारों गाड़ियों का ईंधन, जनरेटर की बिजली और भीड़ जुटाने की पूरा सरकारी तंत्र, सब मिलकर संसाधनों की खपत होती है।
     जनता को भीड़ बनाकर लाना लोकतंत्र नहीं, संकट के समय संसाधनों का दुरुपयोग है। जब देश ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा है, तब बचत की शुरुआत सत्ता के शिखर से भी होनी चाहिए,
न कि सिर्फ जनता के घरों से।