जीना है तो मरना सीखो , मर-मर कर कुछ करना सीखो ...
मेरे गुरु पंडित बृजभूषण दुबे जी की चतुर्थ पुण्यतिथि पर स्मरण-
वह कहते थे-
डर को ताकत बना लो,
सच्चाई से कभी समझौता मत करना।”
आज वही वाक्य मेरे भीतर की ज्वाला हैं, वही मेरे साहस की सांसें हैं।
उनके शब्द अब मेरे लिए संकल्प हैं,
उनकी सीख मेरी शक्ति है।
जब भी मन डगमगाता है,
भीतर से उनकी आवाज़ गूंजती है-
तुम ही कर सकते हो,
तुम ही लड़ सकते हो,
तुम ही जीतोगे…”
गुरुदेव अब नहीं हैं,
पर उनका विचार मेरे भीतर अमर है-
मेरे संकटमोचक अब मेरी ताकत बन गए हैं।
06/11/22 को प्रकाशित
दिव्य श्रद्धांजलि
तुम कर सकते हो...तुम ही लड़ सकते हो... तुम ही जीतोगे...
अब कौन कहेगा ?
हरीश मिश्र ( 9584815781 )
रायसेन l हमेशा खरी बात हिम्मत और सलीके से रखने वाले बौद्धिक क्षमता एवं लेखन शक्ति से संपन्न... मेरे गुरु... वरिष्ठ अधिवक्ता...पं बृजभूषण दुबे जी का आज देवलोक गमन हो गया । उनकी रचना उनके विरले स्वभाव को अभिव्यक्त करती है...
मैं क्यों ना बोलूं खरी-खरी
तुम क्यों ना बोलते खरी-खरी
क्यों रहे आत्मा डरी-डरी
किससे तुम को डर लगता है
किस कारण से दिल डरता है
क्यों बर्फ के माफिक गलता है
क्यों दिल ही दिल में जलता है
क्यों दुष्टों को करता बरी-बरी
क्यों नहीं बोलता खरी-खरी ?
मेरे गुरु विरले स्वभाव के,व्यक्ति थे। दूसरों के प्रति उदार, सरल लेकिन अपने लिए कठोर। यदि उनके जीवन यात्रा पर दृष्टिपात करें तो उनका जीवन उनके सिद्धांत.. उनकी निष्ठा... कठोर तपस्या उनकी खरी-खरी अभिव्यक्ति का माध्यम है।
मैंने उनके बारे में परम पूज्य पिताजी स्वर्गीय पंडित रमाशंकर मिश्र से बचपन में बहुत से किस्से सुने थे। 1998 में उन्होंने एक परिवाद लड़ा। तब मैं उनके संपर्क में आया और उन जैसे गुरु का मुझे सानिध्य मिला । वह मेरे जीवन के पथ दृष्टा बनें। उन्होंने मेरे जैसे मूक व्यक्ति को जो कभी भी माटी में विलीन हो सकता था । उसे दिव्य घोष करने की प्रेरणा दी....वह कहते...
इस दुनिया से डरना मत
डर के मारे मरना मत ।
उनके विचारों से प्रेरित होकर डर को मैंने अपनी ताकत बनाया । एक बार उन्होंने मुझसे कहा हरीश
जीना है तो मरना सीखो
मर-मर कर कुछ करना सीखो
मर कर भी कुछ कर जाओगे सच्चा जीवन जी जाओगे
वह मुझसे कहते ..जो भी होगा... जो करना होगा... वह वक्त करेगा... तुम तो जब तक सांसें हैं...इस मूक माटी की आवाज बनो.... ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के साथ दिव्य घोष करो। क्योंकि
दुनिया वक्त की कहानी है
यह सब कुछ वक्त की निशानी है
वक्त ने कितनों को बढ़ाया है !
वक्त ने कितनों को उड़ाया है !
वक्त आया हो तो काम होता है !
वक्त ना हो तो नाकाम होता है !
वक्त ने हर वक्त देखा है !
वक्त पर हर पल का लेखा है !
मैं जब भी परेशान होता ... जब मुझे अंधेरे से डर लगता ... तब बेखौफ... बेधड़क...बेबाक उनके पास जाता ...वह मुझे सम्मान देते ...सत्कार करते ... ठंडी हवा में... शीतल छांव में आराम से बैठाकर... धीरज से मुझे सुनते ...सहयोग करते ...समर्थन देते ..मैं निडर होकर निसंकोच अपने मन की बात कहता...वह मेरा विश्वास नहीं तोड़ते...वह मेरा साथ नहीं छोड़ते...वह मेरे आत्मविश्वास जागृत करते... वह मुझे आशा देते..वह मुझे मेरी ताकत याद दिलाते ... वह कहते ... तुम कर सकते हो...तुम ही लड़ सकते हो... तुम ही जीतोगे...अब कौन कहेगा...तुम कर सकते हो...तुम ही लड़ सकते हो... तुम ही जीतोगे...अब कौन कहेगा?
मेरे संकट मोचक मुझे छोड़ कर चले गए। गुरु देव के चरणों में शत् शत् नमन्
लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार )



