दिव्य चिंतन 

बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं....

हरीश मिश्र 

रायसेन l बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं... अपनी बस्ती... अपनी माटी...की मुस्कान के लिए घर, परिवार छोड़ कर निकल पड़ता हूं...जोश, जुनून, जज्बे के साथ...मुझे क्या मिलेगा ये मैंने कभी सोचा नहीं... मेरे लिए महत्वपूर्ण  है इस माटी की मुस्कुराहट ...!
    इस बार फिर एक अपराध किया... रायसेन जिला विकास समिति के अपने हरित क्रांति के साथियों के साथ मिलकर...  कदम-कदम पर कदंब लगाए...भारी बारिश हमारे इरादे नहीं बदल  सकी...भरी उमस में पसीना बहाया...उम्मीदों की मिट्टी में बीज डाले...
ऐसे साथियों के साथ जो संख्या में कम हैं,लेकिन इरादे के मजबूत। हम सब इस माटी का ऋण चुकाने... अपनी बस्ती... अपनी माटी...की मुस्कान के लिए कदम-कदम पर कदंब लगाने घर परिवार छोड़ कर निकल पड़े... पत्रकार, डॉक्टर, अधिकारी-कर्मचारी, आम आदमी , सारा शहर ... सामाजिक, राजनैतिक मतभेद भुलाकर साथ खड़ा हो गया... *लेकिन दुर्भाग्य 0.05 % लोगों को माटी की मुस्कान पसंद नहीं आई...और वह अपने सबसे न्यूनतम स्तर 0.0 पर पहुंच गए... कदंब वृक्षों... ट्री गार्ड को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सवाल ये है... ये कैसा उत्सव ? शहर की सुंदरता के लिए लगाए गए ट्री गार्ड में बम रखकर तोड़ दिए...
    मन बहुत दुःखी है... लेकिन ऐसी चुनौती हर उस सफल व्यक्ति और संगठन को मिलती है, जो अच्छे काम करता है... तुम वृक्ष काटने... नष्ट करने और ट्री गार्ड नष्ट करने में समय लगाना और हम संकल्प लेते हैं रायसेन की माटी की मुस्कान वापस लाकर रहेंगे और जब तक सांस चलेगी ..इस बस्ती...इस माटी के लिए ये अपराध करते रहेंगे।