एक दबंग महिला आईएएस अफसर के रूप में अपनी अलग पहचान रखती हैं अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी
भोपाल। अपने बेवाक बयानों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रखने के लिए चर्चित रहने वाली अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी का दो टूक कहना है कि हम सेवा करने के लिए आईएएस बने हैं । वे समाज हित में सख्त फैसले लेने में कभी संकोच नहीं करती । तबादले का उन्हें कभी कोई भय भी नहीं रहा, अंजाम चाहे जो भी हो लेकिन वह अपनी बात पूरी दृढ़ता के साथ रखती हैं , लीक से हटकर फैसला लेती हैं और तो और वह हमेशा अपने सिद्धांतों पर अडिग रहती हैं । अपने सिद्धांतों से कभी किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं करती हैं । उनका नजरिया बिल्कुल स्पष्ट है, जो सही है, वह सही है । उनकी पहली पोस्टिंग असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में जबलपुर में हुई थी l उस समय मध्य प्रदेश अविभाजित था । इसके बाद वे एसडीएम ,एडिशनल कलेक्टर ,डायरेक्टर, मैनेजिंग डायरेक्टर,कलेक्टर, कमिश्नर और कई विभागों में प्रमुख सचिव रहीं और अपने काम के दम पर उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी । वर्तमान में वे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अपर मुख्य सचिव के रूप में कार्य कर रही हैं। मूल रूप से भुसावल , महाराष्ट्र की रहने वाली 1994 बैच की आईएएस अफसर दीपाली रस्तोगी की हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में मजबूत पकड़ है । उनके पति मनीष रस्तोगी भी मध्य प्रदेश शासन में अपर मुख्य सचिव हैं। वे जिन-जिन विभागों में भी रहीं उन्होंने वहां जनहित को देखते हुए कड़े फैसले लिए,इन फैसलों का राजनीति और राजनेताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की। वह एक दबंग महिला आईएएस अफसर के रूप में अपनी एक अलग पहचान रखती हैं। उन्होंने एक बार तो अपने विभाग के कर्मचारियों के लिए फरमान जारी कर दिया था कि लंच के बाद घूमने जाना जरूरी है हालांकि यह फैसला कर्मचारियों स्वास्थ्य के प्रति उनकी फिक्र को दर्शाता है वहीं उन्होंने आदिम जाति कल्याण विभाग में रहते हुए हॉस्टल में रहने वाले आदिवासी बच्चों को इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स कराना अनिवार्य किया था जिसका मकसद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना था । इसी दौरान उनका एक आदेश और सुर्खियों में आया था । उन्होंने दो टूक आदेश जारी किया था कि योजनाओं का बजट सिर्फ और सिर्फ योजनाओं पर ही खर्च होगा, यात्राओं और रेलियों पर नहीं । उन्होंने तो आदिवासी बच्चों के राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों में ले जाए जाने पर भी रोक लगाई थी । वह जब-जब भी जिस - जिस विभाग में रही हैं ,उन्होंने कडे़ से कड़े फैसले लिए हैं और उन फैसलों का असर भी दूरगामी हुआ है यही वजह रही है कि वे जहां-जहां भी कार्यरत रही हैं वहां के लोग उन्हें आज भी याद करते हैं l वे अच्छा काम करने वाले और नवाचार करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों को हमेशा प्रोत्साहित करती हैं l दबंग महिला आईएएस अफसर के रूप में उनकी अपनी एक अलग पहचान है।


