दिल्ली l  मुबारकपुर के रहने वाले मुकेश कुमार ने 184 रुपये की बिरयानी न मिलने पर हार नहीं मानी और करीब डेढ़ साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्हें न्याय मिला और संबंधित कंपनियों को 30 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया। यह मामला 8 जनवरी 2024 का है। मुकेश कुमार ने दोपहर 12:05 बजे पेटीएम के जरिए कनॉट प्लेस स्थित बिरयानी बाय किलो से 184.76 रुपये की बिरयानी ऑर्डर की थी। डिलीवरी की जिम्मेदारी मैजिकपिन के पास थी। भुगतान करने के बावजूद उन्हें न तो खाना मिला और न ही डिलीवरी राइडर की ओर से कोई कॉल या संदेश आया।करीब एक घंटे बाद दोपहर 1:05 बजे मुकेश को मैजिकपिन के एक प्रतिनिधि का फोन आया। उन्हें बताया गया कि डिलीवरी राइडर उनके पते पर पहुंचा था, लेकिन कॉल रिसीव न करने के कारण ऑर्डर वापस कर दिया गया। मुकेश का कहना था कि उनके फोन पर डिलीवरी से संबंधित कोई कॉल या मैसेज आया ही नहीं। उन्होंने इस बारे में सीधे रेस्टोरेंट से भी संपर्क किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। मामला बढ़ने पर मुकेश ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद नई दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्यों बरीक अहमद व चंद्रशेखर की पीठ ने माना कि समय पर भोजन की डिलीवरी न होना सेवा में कमी है। आयोग ने बिरयानी बाय किलो और मैजिकपिन को संयुक्त रूप से 30,000 रुपये मुआवजा और मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया। साथ ही, निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर भुगतान न करने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।