खेतों तक पहुँची यह पहल किसानों के लिए सिर्फ प्रक्रिया नहीं, बल्कि भरोसे की बहाली का प्रयास है
तकनीकी अड़चन पर प्रशासन की तत्परता: खेत तक पहुंचा प्रशासन
रायसेन ( हरीश मिश्र )
डिजिटल दौर में अक्सर यह शिकायत रहती है कि व्यवस्था स्क्रीन तक सिमट जाती है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखी। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग के दौरान पोर्टल पर आई तकनीकी त्रुटि ने कुछ किसानों को “पुनः सत्यापन शेष” के दायरे में खड़ा कर दिया था।
आशंका यह थी कि कहीं यह डिजिटल अड़चन उनके अनाज की बिक्री में देरी न कर दे।
लेकिन प्रशासन ने इस स्थिति को केवल तकनीकी समस्या मानकर टालने के बजाय ज़मीनी स्तर पर समाधान तलाशने का रास्ता चुना। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने एसडीएम और राजस्व अमले को निर्देश दिए कि लंबित मामलों का जल्द से जल्द पुनः सत्यापन कराया जाए, ताकि किसानों को स्लॉट बुकिंग में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इस पहल की खास बात यह रही कि निर्देश फाइलों तक सीमित नहीं रहे। शुक्रवार को कलेक्टर स्वयं ग्राम मेंडोरी और नीमखेड़ा के खेतों तक पहुँचे और फसल का पुनः सत्यापन किया। उनके साथ सहायक कलेक्टर कुलदीप पटेल, एसडीएम मनीष शर्मा और तहसीलदार भरत सिंह मंडले भी मौजूद रहे।
प्रशासन की यह सक्रियता एक सकारात्मक संकेत देती है कि तकनीकी खामियों के बीच भी यदि नीयत स्पष्ट हो, तो समाधान दूर नहीं होता। खेतों तक पहुँची यह पहल किसानों के लिए सिर्फ प्रक्रिया नहीं, बल्कि भरोसे की बहाली का प्रयास है।
डिजिटल सिस्टम की गति और ज़मीनी संवेदनशीलता का यह संतुलन अगर बना रहे, तो उपार्जन प्रक्रिया न केवल सुचारु होगी, बल्कि किसान के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।


