इछावर तहसील के ग्राम उलझावन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर  वायरल हो रहा है, जिसमें विद्युत मंडल की कुर्की कार्रवाई ने प्राकृतिक_न्याय के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    वीडियो में जैसा दिख रहा है , विधि विरुद्ध है,
   विधुत मंडल के कर्मचारी  मौके पर पंचनामा तैयार किए बिना और बिना राजस्व अधिकारी की प्रत्यक्ष निगरानी के, एक किसान के निजी परिसर (बाखल) में प्रवेश कर ट्रैक्टर जब्त कर ले गए। यह दृश्य न केवल प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली की संवेदनशीलता पर भी चिंतन को मजबूर करता है।
कानूनी प्रावधान स्पष्ट कहते हैं कि किसी भी संपत्ति की जप्ती गवाहों की उपस्थिति, विधिवत पंचनामा और संपूर्ण दस्तावेजीकरण के साथ की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार के विवाद या अनियमितता की गुंजाइश न रहे।      
      लेकिन वायरल वीडियो में यह आवश्यक प्रक्रिया अनुपस्थित प्रतीत होती है। ऐसे में सवाल उठता है, क्या वसूली की जल्दबाजी में नियमों को दरकिनार किया जा रहा है ?
   क्योंकि जब कानून की किताबें कुछ और कहें और जमीन पर दृश्य कुछ और दिखें, तो यह सिर्फ एक कुर्की नहीं, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बन जाती है।