माफिया के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पूर्व सीएम से ही भीड़ गई थी आईपीएस अफसर रुचिवर्धन मिश्र
भोपाल l तेजतर्रार महिला आईपीएस अफसर रुचि वर्धन मिश्र सरस्वती शिशु मंदिर की मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने जेएनयू से एमए ,एम फिल किया और यूपीएससी में संस्कृत विषय का चयन किया l वे 2006 बैच की टॉपर रही हैं, उनका निशाना भी अचूक है । जिस तरह अर्जुन को सिर्फ और सिर्फ चिड़िया की आंख दिखाई देती थी ,अर्जुन की तरह ही आपको भी अपना टारगेट ही दिखाई देता है। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें निशानेबाजी में 10/10 अंक प्राप्त हुए थे । कई जिलों में एसपी रहीं,संभागो में डीआईजी रहीं और इंदौर की पहली महिला एसएसपी भी रहीं रुचि वर्धन मिश्र अपनी दो साल की बच्ची को साथ लेकर रात्रि का पर निकलती थी । हिंदी, इंग्लिश और संस्कृत तीनों ही भाषाओं में उनकी कमांड जबरदस्त है, वह अपने काम में राजनैतिक हस्तक्षेप पसंद नहीं करती हैं l एक बार तो वे माफिया के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पूर्व सीएम से ही भिड़ गई थीं। उनका अपना काम करने का अलग अंदाज है ,वह जहां-जहां भी रहीं उनकी कार्यशैली प्रभावी रही। यही वजह है कि वहां के लोग उन्हें आज भी याद करते हैं। आईपीएस अफसर रुचि वर्धन मिश्र हर महिला के लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं।
उनका IPS और IAS दोनों में चयन हुआ था लेकिन आईपीएस का जाब लड़कियों के लिए चैलेंजिग होता है इसीलिए आईपीएस को कैरियर के रूप में चुना। वे स्वयं कहती हैं कि आईपीएस एक चैलेंजिंग जॉब है और इसमें हमेशा फील्ड में रहते हुए देश के लिए कुछ करने का मौका होता है।
वे बताती हैं कि पुलिस कर्मियों में अत्यधिक तनाव, अनियमित काम की अवधि , नींद की समस्या , उनके स्वास्थ्य , उनके गुस्से और आवेग को लेकर संवेदनशील डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा स्वयं चिंतित हैं और उन्होंने हार्टफुलनेस संस्थान के साथ एक करार किया है I इसी करार के तारतम्य में हार्टफुलनेस संस्थान और आईजी रुचि वर्धन मिश्र के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पुलिस के समस्त पुलिस कर्मियों को निशुल्क ध्यान और योग का नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है I और इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं I आप वर्तमान में पुलिस महानिरीक्षक ,प्रशासन (आईजी, एडमिन) के पद पर पुलिस मुख्यालय में पदस्थ हैं। वरिष्ठ पत्रकार तेजेंद्र भार्गव ने आईजी रुचि वर्धन मिश्र से लंबी चर्चा की l प्रस्तुत हैं उस साक्षात्कार के मुख्य अंश....



