भोपाल। महिलाएं सनातन काल से लेकर आधुनिक काल तक प्रत्येक क्षेत्र में सफलता और विश्वास की पर्याय मानी जाती रही हैं। इतिहास गवाह है कि महिलाओं ने अपनी कार्यशैली और कार्य क्षमताओं की कई मिसालें पेश की है। ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्होंने अपनी ईमानदारी ,योग्यता और प्रशासनिक दक्षता के चलते अपनी अलग पहचान बनाई। वे जिस-जिस पद पर रहीं उन्होंने अपनी निष्पक्ष कार्यशैली की दम पर उस पद के कद को ही ऊंचा कर दिया । अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम ऐसी ही एक महिला की बात कर रहे हैं, जो दूसरों की पीड़ा को खुद महसूस करती रही हैं जिन्होंने धर्म, जाति और राजनैतिक दलों की सीमा से ऊपर उठकर पूरे समर्पण के साथ पीड़ित मानवता की सेवा की है और गरीब, असहाय महिलाओं को न्याय भी दिलाया। जी हां हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष श्रीमत्ती उपमा राय की। राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती उपमा राय के कार्यकाल को कौन भुला सकता है, उन्होंने जिस अंदाज में कार्य किया वह काबिले तारीफ रहा है। चाहे महिला आयोग की सदस्य के रूप में हो, अध्यक्ष के रूप में हो या फिर उपभोक्ता आयोग में सदस्य के रूप में अपनी कार्यशैली से उन्होंने ना सिर्फ प्रभावित किया बल्कि बड़े बड़े मामलों में न्याय करके अपनी प्रशासनिक क्षमताओं का भी लोहा मनवाया। उपभोक्ता आयोग में उनके द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसले भी नजीर बन गए l एक हॉस्पिटल से जुड़ा मामला था जिसमें एक ग़रीब महिला को ब्रेन में क्लॉटिंग होने की वजह से स्ट्रोक आया और  अस्पताल की तरफ़ से उसे उचित इलाज और सुविधा नहीं दी गई जिसके कारण वह युवती पूरे जीवन के लिए अपाहिज हो गई  उन्होंने उस अस्पताल पर उस समय 26 लाख रुपये का हर्ज़ाना लगाया था ताकि उस युवती की जीवन पर्यन्त  सही देखभाल का प्रबंध हो सके और उसका परिवार उसका पूरा ख़र्चा उठा सके l उस समय का यह लैंड मार्क डिसिज़न था l इसके पहले किसी भी फ़ोरम ने किसी भी अस्पताल पर इतना बड़ा जुर्माना नहीं लगाया था l ऐसी अनेकों मामलों में उन्होंने पूरी तरह न्याय किया उनकी निष्पक्षता को कोई प्रभावित नहीं कर सका। मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग में सदस्य और फिर अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि यदि कोई भी पीड़ित महिला उनसे दूरभाष पर भी अपनी समस्या को बताती थी तो वह दूरभाष पर ही उस समस्या का निदान करने का प्रयास करती थी। उनकी निष्पक्ष कार्यशैली के चलते ही आज भी उनकी सराहना की जाती है। उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है, उन्हें जब-जब जो भी जिम्मेदारी मिली उन्होंने उसे बखूबी निभाया जो भी पीड़ित उनसे मिलने आया उन्होंने उसे कभी निराश नहीं किया। एक समय था जब मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग का नाम हुआ करता था। महिला आयोग प्रदेश की महिलाओं को तत्परता के साथ न्याय दिलाने को लिए जाना जाता था, उस समय आयोग की अध्यक्ष थी श्रीमती उपमा राय। महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को महिला आयोग का गोल्डन पीरियड माना जाता है। उन्होंने महिलाओं की मदद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, जो भी महिलाएं राज्य महिला आयोग में उनके पास आई उन्होंने उन्हें निराश नहीं होने दिया। हर स्तर पर जाकर उन्होंने महिलाओं की मदद की। वे महिला आयोग में सिर्फ न्यायाधीश ही नहीं बल्कि एक ममतामयी मां के रूप में भी नजर आई l कई बार शिकायत करने आई पीड़िताओं के पास खाने के पैसे भी नहीं होते थे, तो किसी के वापस जाने का किराया भी नहीं होता था l श्रीमती उपमा राय उन्हें अपने पर्स से निकालकर पैसे देती थी, उनके मन की यही करुणा और यही सेवा भाव उन्हें दूसरों से अलग बनाता है l यही वजह है कि आज मध्यप्रदेश के छोटे-छोटे गांव, शहरों, जिलो से लेकर संभागों तक श्रीमती उपमा राय को लोग जानते हैं। उनके कार्यकाल में महिला आयोग न्याय का मंदिर बन गया था। उन्होंने कई मामलों को मुकाम तक भी पहुंचाया। कई बड़े मामलों में उनके पास राजनैतिक दबाव भी आए परंतु वे राजनैतिक रूप से सबल आरोपियों के खिलाफ गरीब पीड़ित महिलाओं के साथ ही खड़ी रही यही वजह रही कि वे कई राजनेताओं की नजरों में भी खटक गई इसलिए उन्हें ना तो आयोग में ही रिपीट किया गया और ना ही कोई बड़ी जिम्मेदारी दी गई। उन्हें उनकी ईमानदारी का पुरस्कार मिलने की बजाय सजा ही मिली।