झाबुआ जिले में अद्यतन स्थिति में वर्षा का दौर जारी होकर 728.53 मि.मी. वर्षा दर्ज की जा चुकी है। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास जिला झाबुआ श्री एन.एस. रावत द्वारा खरीफ फसलों में लगने वाले कीटव्याधियों के प्रकोप नियंत्रण हेतु कृषकों के लिए उपयोगी सलाह जारी की गई है जो इस प्रकार है:-

        जिन किसान भाईयों के खेत में सोयाबीन, उड़द की फसल में पीला मौजेक का प्रकोप देखा गया हो, वह इसके नियंत्रण हेतु प्रारंभिक अवस्था में ही अपने-अपने खेत में जगह-जगह पर पीला चिपचिपे जाल (20-25 जाल/हैक्टेयर) लगाए, जिससे इसका संक्रमण फैलाने वाली सफेद मक्खी के नियंत्रण में सहायता मिलें। कृषक भाईयों को यह भी सलाह दी जाती है कि फसल पर पीला मौजेक के लक्षण दिखते ही ग्रसित पौध को अपने खेत से निष्कासित करें। खड़ी फसल में सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए जैसे ही लक्षण दिखाई दें, फसल पर रासायनिक दवा एसिटामिप्रिड 25% + बिफेन्थिन 25% डब्ल्यूजी 250 ग्राम या बीटासायफ्लुथ्रिन इमिडाक्लोप्रीड 350 एम.एल. या थायोमिथाक्सम + लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 एम.एल. 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टेयर छिडकाव करें, जिससे सफेद मक्खी के साथ-साथ पत्ती खाने वाले कीटो का भी एक साथ नियंत्रण हो सके। कुछ क्षेत्रों में लगातार हो रही रिमझिम वर्षा की स्थिति में पत्ती खाने वाली इल्लियों के नियंत्रण हेतु इन्डोक्साकार्ब 333 एम.एल. प्रति हैक्टेयर या लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.9% सी.एस. 300 एम. एल. प्रति हैक्टेयर का छिडकाव करें।

        जिन क्षेत्रों में अधिक वर्षा से जल भराव की स्थिति है, खरीफ उड़द की फसल में होने वाले संभावित नुकसान को कम करने हेतु शीघ्रातिशघ्र जल निकासी की व्यवस्था करें। सोयाबीन, कपास की फसल में फफूँद जनित एंथ्रेकनोज तथा राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाईट नामक बीमारी का प्रकोप होने पर टेबुकोनेझोल 625 एम.एल. प्रति हैक्टेयर या टेबुकोनेझोल+सल्फर 1 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर या हैक्साकोनेझोल 5% ई.सी. 800 एम.एल. प्रति हैक्टेयर के मान से छिडकाव करें। मक्का फसल में फॉल आर्मीवर्ग के नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफॉस 20% ई.सी. या ईमामेक्टिन बेन्जोएट 55 प्रतिशत ई.सी. 04 ग्राम/10 मि.ली. या थायोमेथाक्झम लैम्बाडासायहेलोथिन 0.5 एम. एल. प्रति लीटर पानी में उचित घोल बनाकर छिड़काव करें। कपास की फसल में रस चूषक कीट एफिड का प्रकोप होने पर एसीटामेप्रिड दवा का 10 मिली प्रति स्प्रे पंप के मान से घोल बनाकर छिडकाव करने की सलाह दी जाती है।

          विभाग द्वारा किसान भाईयो से यह अपील की जाती है कि अपनी फसल पर निरन्तर निगरानी रखें व समय पर कीट नियंत्रण हेतु सामूहिक रूप से प्रयास करें तथा अनुशंसित कीटनाशक दवा का उचित समय पर उचित घोल बना कर छिडकाव करे। वर्षा ऋतु के दौर में ढलाव वाले (निचले स्तर) खेतों में जल भराव की स्थिति बनने पर उचित जल निकास हेतु नाली बनवाये। अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र एवं नजदीकी कृषि कार्यालय से सम्पर्क करें एवं मैदानी अमलों से उचित मार्गदर्शन लेवे।