इंदौर के रंगवासा गांव में 25 अप्रैल को भाई-बहन की शादी तय की गई थी। महिला एवं बाल विकास विभाग को शिकायत मिली, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची। टीम को जो मार्कशीट दिखाई, उस पर दोनों की उम्र विवाह योग्य बताई गई, लेकिन संदेह होने पर दस्तावेजों की जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि इंदौर की अंकसूची फर्जी निकली, जबकि होशंगाबाद से मिली असली जानकारी में बच्ची की उम्र महज 13 साल और लड़के की 19 साल पाई गई। जैसे ही सच्चाई सामने आई, प्रशासनिक टीम तुरंत हरकत में आई और विवाह रुकवाने के लिए मौके पर पहुंची। परिजनों के पास कोई भी मूल दस्तावेज नहीं मिला। इसके बाद सख्ती से पूछताछ करने पर परिवार वालों ने दोनों के नाबालिग होने की बात मानी और शादी निरस्त कर दी गई। समाज की ‘बेटी दो-बेटी लो’ प्रथा के चलते दादा ने अपने पोते की शादी कराने के लिए 13 साल की पोती का रिश्ता 42 वर्षीय व्यक्ति से तय कर दिया था।