एनपीके 12:32:16 उर्वरक में मिलावट नहीं, रेत/मिट्टी का उपयोग वैज्ञानिक कारणों से: किसान भ्रांति में न रहें
शिवपुरी जिले के लुधावली स्थित विपणन संघ भंडारण केंद्र से कृषक द्वारा खरीदे गए एनपीके 12:32:16 मिश्रित उर्वरक को पानी में घोलने पर रेत मिलने की जानकारी दी गई थी। इस विषय पर किसान भाईयों को सूचित किया जाता है कि यह कोई मिलावट नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत किया गया आवश्यक उपयोग है।
कृषि विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि एनपीके उर्वरक में पोषक तत्वों के अनुपात को संतुलित रखने के लिए फिलर्स के रूप में मिट्टी, रेत, डोलोमाइट या बेंटोनाइट जैसे पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। ये फिलर्स एफसीओ (फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर) 1985 के तहत स्वीकृत हैं और यह उर्वरक की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं लाते।
कृषक भ्रम में न रहें एवं अफवाहों पर ध्यान न दें। एनपीके उर्वरक में प्रयुक्त रेत/मिट्टी जैसे फिलर्स घुलनशील पोषक तत्वों को पौधों तक पहुंचाने के बाद स्वयं अवशेष रूप में मिट्टी में ही रह जाते हैं, जिनसे कोई हानि नहीं होती। यदि किसी किसान को फिर भी संदेह हो, तो वह अपने निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र जाकर कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
कंपनी का स्पष्टीकरण:
उर्वरक निर्माता पारादीप फॉस्फेट लिमिटेड (PPL) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एनपीके 12:32:16 के निर्माण में अमोनिया, फॉस्फोरिक एसिड, म्यूरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी), सल्फ्यूरिक एसिड और फिलर्स (रेत/मिट्टी/डोलोमाइट) का उपयोग होता है। फिलर्स निष्क्रिय पदार्थ होते हैं जिनका कार्य केवल पोषक तत्वों के अनुपात को नियंत्रित करना होता है। यह पूरी प्रक्रिया एफसीओ 1985 के प्रावधानों के तहत होती है और पूर्णतः वैध है।
कृषि विभाग किसान भाईयों से अपील करता है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और सत्य जानकारी के लिए विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।



