दलित की झोपड़ी से सामाजिक समरसता का संदेश दे गए सिंघम
भोपाल l हम निकल पड़े हैं प्रण करके, अपना तन मन अर्पण करके जिद है एक सूर्य उगाना है ,अंबर से ऊंचा जाना है एक भारत नया बनाना है ...संघ के लाखों, करोड़ों स्वयंसेवक देश और प्रदेश में समाज और राष्ट्र की बेहतरी के लिए अनवरत् सेवा कार्यों में लगे हैं l एकात्मक भाव ही इस भारत का मूल भाव है, इसी भाव के छिन्न होने के चलते भारत विदेशी आक्रांताओं के अधीन रहा और अभी भी समाज में धर्मांतरण जैसी बुराइयां फैली हुई है l हमारा कंठ कौपनिषद स्वयं कहता है कि एक स्वथा सर्वमुतान्तारात्मा अर्थात समस्त प्राणियों की अंतरात्मा में एक ही परम ब्रह्म है ,जो सभी प्राणियों में विराजमान है l ईश्वर एक है सभी में एक ही आत्मा है फिर वह दलित, अवर्ण, स्वर्ण कैसे हो सकते हैं l अभी हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने गरीब दलित संतोष परोचे के घर भोजन करके, प्रदेश और देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया है l समाज बदलने के लिए सिर्फ भाषण नहीं कर्म भी चाहिए मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल पिपरिया पुंवारिया (छातेर) गांव पहुंचे और दलित परिवार के साथ भोजन करके उन्होंने सामाजिक समरसता का एक बहुत बड़ा संदेश दे दिया और ऐसा काम सिर्फ और सिर्फ सिंघम ही कर सकता है .. चिकित्सा शिक्षा मंत्री वह सिंघम है जिन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के भाव, बाबा साहब अंबेडकर की भावना को बल दिया है l चिकित्सा शिक्षा मंत्री वह सिंघम है जिन्होंने संघ की सामाजिक समरसता देने वाली गाइडलाइन एक मंदिर, एक कुआं और एक शमशान तभी हो गांव खुशहाल को चरितार्थ किया है l वास्तव में मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल "वसुदैव कुटुंबकम" के वेद मंत्रों पर चलकर जात-पात, ऊंच- नीच के भेदभाव को समाप्त कर सामाजिक समरसता प्रगाढ़ करने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं l एक गरीब की झोपड़ी से उन्होंने देश और दुनिया को सीधा संदेश दिया है और इस संबंध में स्वयं चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का कहना है कि बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों ने मुझे समरसता के भाव को आत्मसात करना सिखाया है। आज जब मैं जनप्रतिनिधि हूँ, तो मेरे लिए यह सबसे बड़ा दायित्व और सौभाग्य है कि समाज में समरसता के इस भाव को और गहराई तक पहुँचाने के लिए प्रेरित कर सकूँ।
श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा था कि 'अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति की सबसे पहले चिंता करनी है।' इसी भावना को आत्मसात करते हुए आज मैंने पिपरिया पुंआरिया (छातेर) में अनुसूचित जाति के भाई श्री संतोष परोचे जी के घर पर भोजन किया।
श्री संतोष जी सहित उनके परिवार की आत्मीयता और स्नेह से भरे स्वागत ने मन को गहराई तक छू लिया।
कुछ दिन पहले यहां पर लोगों ने भोजन किया था, उनके विरुद्ध सामाजिक हिष्कार के लिए असामाजिक तरीके से पंचायत करने की जानकारी मिली थी। मुझे इस घटनाक्रम से बहुत तकलीफ़ हुई, मन आहत हुआ और मैंने स्वयं तय किया कि संतोष जी के घर पहुंचकर भोजन करूंगा।
साथियों, हमें इस बात का स्मरण रहना चाहिए कि जब हम भेदभाव भुलाकर एक परिवार की तरह जुड़ते हैं, तो समाज की सबसे बड़ी ताकत प्रकट होती है।
आइए, हम सब मिलकर समाज में समरसता, आत्मीयता और अंत्योदय की भावना को सशक्त बनाएं साथ ही आगे बढ़ें मजबूत समाज और विकसित भारत की ओर... चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का यह कार्य निस्संदेह एक नया भारत बनाने की परिकल्पना को साकार करने वाला ही है ... मध्य प्रदेश सरकार का यह तेजस्वी और ओजस्वी युवा चिकित्सा मंत्री जनहित के हर काम को पूरी ताकत के साथ करते हैं l गांव के गरीब से लेकर किसान के खेत तक और राशन दुकान से लेकर मंडी की तुलाई व्यवस्था तक हमेशा सक्रिय रहकर लोगों की सेवा करते हैं चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल l


