दमोह l 1984 में हुए उपचुनाव में जयंत मलैया पहली बार भाजपा के टिकट पर जीत कर विधायक बने थेl इसके बाद 1998, 2003, 2008 और 2013 में जयंत मलैया दमोह विधानसभा से चुनाव जीते l वित्त मंत्री रहे जयंत मलैया को 2018 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा l उनके खास कहे जाने वाले पथरिया  विधायक लखन पटेल को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा l राजनैतिक गलियारों में चर्चा थी कि पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री डॉ रामकृष्ण कुसमरिया से अदावत करना जयंत मलैया को भारी पड़ गया थाl उन्होंने ना सिर्फ मंत्री जयंत मलैया को दमोह से चुनाव हराया बल्कि लखन पटेल को पथरिया से चुनाव हरवाने में भी उन्हीं की भूमिका रही l आखिर कुसमरिया "बाबाजी " इतना नाराज क्यों थे l बात उस समय की कर रहे हैं जब कुसमरिया मध्यप्रदेश सरकार में कृषि मंत्री हुआ करते थे 2013 में बाबा पथरिया से ही विधान सभा चुनाव लड़ना चाहते थे l बाबा की टिकट काटकर लखन पटेल को दे दी गई और बाबा को राजनगर से टिकट दी गई, राजनगर में कुंवर विक्रम सिंह नातीराजा से बाबा जी को हार का सामना करना पड़ा l उस समय उनकी विधानसभा बदलवाने में भी जयंत मलैया का हाथ होने की अफवाह राजनीतिक गलियारों में चलीl इसके बाद 2018 में बाबा एक बार फिर पथरिया से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन मलैया के चहेते लखन पटेल को ही टिकट मिली इसीलिए बाबा ने दमोह और पथरिया दोनों जगह से निर्दलीय चुनाव लड़कर इन दोनों को हरायाl दमोह में निर्दलीय खड़े हुए कुसमरिया ने 1133 वोट लिए और जयंत मलैया 798 वोट से चुनाव हार गए वही पथरिया विधानसभा क्षेत्र में कुसमरिया ने 8755 लिए और तात्कालीन विधायक लखन पटेल बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी रामबाई से 2205 वोट से हार गए l इस तरह बाबा जी ने मंत्री से अदावत का बदला ब्याज समेत चुका दिया था और अब राहुल लोधी के भाजपा में आने के बाद उपचुनाव में हार के कारण मलैया पर भी सवाल उठे l आगामी चुनाव में यदि भाजपा राहुल लोधी को टिकट देती है तो जयंत मलैया का राजनैतिक भविष्य अधर में लटक जाएगाl हालांकि इस बार जयंत मलैया स्वयं मैदान में ना आकर सिद्धार्थ मलैया पर दाव जरूर लगाएंगेl