बालाघाट जिले के लालबर्रा विकासखंड के अंतर्गत बिरसोला सेक्टर में नवपदस्थ कृषि विस्तार अधिकारी आंचल खोब्रागड़े अपने कार्यों से किसानों के बीच लोकप्रिय होते जा रही है। लगभग दो माह पूर्व ही शासकीय सेवा में आने वाली आंचल ने अल्प समय में ही किसानों का विश्वास हासिल कर लिया है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को रागी, अरहर के बीज मिनीकिट वितरण करना हो या कीटनाशक दवाओं का वितरण करना हो, आंचल ने पूरी जिम्मेदारी के साथ स्थानीय सरपंच एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उनका वितरण कराया है। इतना ही नहीं वह अपने क्षेत्र के ग्रामों का भ्रमण करकिसानों के सतत सम्पर्क में रहकर उन्हें जरूरी सलाह और मार्गदर्शन भी दे रही है। अब आंचल इससे भी आगे बढ़कर किसानों के खेत में महिलाओं के साथ खार खोदकर और धान का रोपा लगाकर उनका उत्साहवर्धन भी कर रही है। युवा कृषि विस्तार अधिकारी आंचल की यह पहल सराहनीय है और अन्य युवा अधिकारियों के लिए अनुकरणीय है।

                           18 जुलाई 2025 को कृषि विस्तार अधिकारी आंचल खोबरागड़े द्वारा अनोखी पहल करते हुए ग्राम चंदपुरी में कृषक एवं पूर्व सरपंच धनराज पटले के खेत में महिलाओं के साथ खार खोदी गई और पेंडी भी फेकी गई । इसके बाद उसने महिलाओं के साथ धान का रोपा-परहा भी लगाया और रोपा लगाने की तकनीक भी बताई। आंचल ने महिलाओं को बताया कि पौधों के बीच में एक निश्चित दूरी रखना है और एक स्थान पर एक ही पौधा लगाना है। इसके पूर्व आंचल ने ग्राम गोंडेगांव में भी एक किसान के खेत में परहा लगाया गया था । आंचल की इस पहल से कृषकों और महिलाओं का उत्साह वर्धन हो और उन्हें नई सीख मिल रही है।

                             आंचल खोबरागड़े ने बताया गया कि उपसंचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय के दिशा निर्देशानुसार एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में किया गया कार्य हमारे लिए प्रेरणादायक है । चंदपुरी में जिन किसानों एवं महिलाओं के साथ खार खोदी गई है उनमें पूर्व सरपंच धनराज पटले, नीलकंठ पटले, विजय पटले, दिनेश पटले, लिखंन परते, संतोष, अशोक, दुर्गा पटले, सलोनी पटले, खेलनबाई पटले, भागन बाई पटले, तुरसन बाई बिसेन, बसंता बाई मेश्राम, सरगम बिसेन, गंगेश्वरी बोपचे, मौसम बोपचे, गीता मेश्राम, दुर्गा मेश्राम उपस्थित रहे। इस दौरान किसानों को क‌षि यंत्र खरीदने और सभी किसानों को राष्ट्रीय पोषण उद्यानिकी मिशन में पंजीयन कराने की सलाह दी गई और किसानों को नेचुरल फार्मिंग के लिए प्रेरित किया गया।