विदिशा l दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार धानसोयाबीन एवं मक्का की खडी फसल में पौधों की वृद्धि हेतु कृषक भाई डीएपी उर्वरक का छिडकाव कर रहे हैं। इस संबंध में कृषकों को सलाह दी जाती है कि डीएपी का उपयोग छिडकाव हेतु ना करें।

     डीएपी उर्वरक मुख्य रूप से बुवाई के समय मिट्टी में मिलाकर उपयोग करने से उर्वरक का लाभ प्राप्त होता है। फसल उगने के पश्चात बाद में फसल की वृद्धि हेतु यूरिया या नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का छिडकाव किया जा सकता हैजबकि डीएपी के छिडकाव करने से डीएपी में उपलब्ध मात्रा पौधों को ना के बराबर उपलब्ध हो पाती है और संपूर्ण मात्रा का उपयोग नहीं हो पाता और व्यर्थ चली जाती है जिससे कृषक एवं देश को वित्तीय हानि होती है।