कृषि सखी हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र, पर प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण‘‘
राजगढ़ l कृषि विज्ञान केन्द्र में केन्द्र सरकार द्वारा प्राप्त निर्देशानुसार नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजनान्तर्गत ‘‘प्राकृतिक खेती’’ में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु 26 अगस्त, 2025 तक प्रथम पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.के. कौषिकके द्वारा किया गया। इस दौरान जिले के विभिन्न विकासखण्डों से उपस्थित 40 कृषि सखियों को संबोधित करते हुये बताया कि प्राकृतिक खेती योजना का परिचय कृषि सखियों की भूमिकायें एवं जिम्मेदारियों के बारे में बताया गया। इसके साथ ही प्राकृतिक कृषि को एक समग्र कृषि प्रणाली जो मिट्टी के पुनः बनने, पानी, हवा की गुणवत्ता सुधार करने और पौषक तत्वों से भरपुर भोजन का उत्पादन करने में मददगार होता है। साथ ही प्राकृतिक खेती को अपनाने से मिट्टी की भौतिक, जैविक और रसायनिक असंतुलन को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इस प्रकार की खेती में फसल अवशेष या फार्म बायोमास मल्चिंग पर प्रमुख जोर दिया जाता है। पौषक तत्वों का कुशल रिसाइल्किंग के लिये नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने व फलीदार फसलों के साथ सहजीवन में फसल चक्र में विविधता लाते हुये फसलों के देशी बीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इस खेती में गाय के गोबर एवं गौमूत्र से जीवामृत, बीजामृत, धनजीवामृत, नीमास्त्र, दषपर्णी अर्क आदि सामग्री बनाई जाती है। जिसका उपयोग करने से मिट्टी का स्वास्थ्य एवं फसलों के उत्पादन से मानव स्वास्थ्य अच्छा होता है। फसल लागत कम आती है। तत्पश्चात् इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक किसान संघ के श्री अषोक जाट द्वारा भी प्राकृतिक खेती पर अपने विचार प्रशिक्षार्थियों के सामने रखे और इसे खेती में आज भी आवश्यकता के बारे में बताया। साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्र, के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रूपेन्द्र खाण्डवे, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए.के. मिश्रा, पौध प्रजनन, डॉ. लाल सिंह, वैज्ञानिक उद्यानिकी एवं श्रीमती ग़जा़ला खान वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (आई.टी.) किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग से मैदानी अधिकारी श्री पदमाकर सगर एवं श्री वेदप्रकाश सेन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दी एवं प्रशिक्षार्थियों से प्राकृतिक खेती पर जिले में संभावना पर विस्तृत चर्चा की। केन्द्र की श्रीमती ग़जा़ला खान ने कृषि सखियों को प्रशिक्षण पूर्व मूल्याकंन प्रश्नोत्री वितरित कर उनके ज्ञान के स्तर का प्राकृतिक खेती पर आज की स्थिति में आकंलन किया। कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक उद्यानिकी डॉ. लाल सिंह ने किया।


