आगर मालवा l उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती समारोह में संबोधित करते हुए कई तीखे और विवादित बयान दिए। अपने उद्बोधन में उन्होंने समाज सुधारक माने जाने वाले राजा राममोहन राय को “अंग्रेजों का दलाल” बताया और कहा कि अंग्रेजी शासन मिशनरी स्कूलों के माध्यम से देश में लोगों की आस्था बदलने की साजिश चला रहा था l परमार ने कहा कि उस दौर में अंग्रेजों द्वारा संचालित मिशनरी स्कूल ही शिक्षा का प्रमुख साधन थे, जहां धर्मांतरण की गतिविधियां चलाई जाती थीं। उनके अनुसार अंग्रेजों ने राजा राममोहन राय को “फर्जी समाज सुधारक” के रूप में पेश किया। उन्होंने आगे कहा कि अंग्रेजों और मिशनरी गतिविधियों के खिलाफ साहसपूर्वक खड़े होने वाले सच्चे वीर बिरसा मुंडा थे। मंत्री परमार ने दावा किया कि बिरसा मुंडा भी पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन मिशनरी गतिविधियों को समझकर उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ आंदोलन में कूद पड़े।

 ⁠बिरसा मुंडा जयंती के कार्यक्रम में दिए गए इस बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाने की संभावना है। मंत्री के वक्तव्य पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रिया आने की भी उम्मीद है।